बुरहानपुर/20 फरवरी, 2025/- बर्ड फ्लू पक्षियों में वायरल डिसीज है। इस बीमारी से पक्षियों में सांस लेने में तकलीफ होने के साथ ही नाक एवं मुँह से पानी टपकता है। वहीं पक्षियों के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है तथा कलगी का कलर हल्का नीला हो जाता है, जिसके कारण पक्षी सुस्त होकर मरने लगते है।
उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. हीरासिंह भंवर ने जानकारी देते हुए बताया कि, बुरहानपुर जिले में पूर्व में वर्ष 2006 में इस बीमारी का प्रकोप हो चुका है। जिससे अधिक संख्या में पक्षियों की मृत्यु हुई थी। यह बीमारी एक पक्षी से दूसरे पक्षी में व दूषित पानी से अथवा प्रभावित पक्षी के मल-मूल पंखों आदि के जरिये पूरे झुंड को तेजी से प्रभावित कर सकती है।
पशुपालन विभाग द्वारा जनहित में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा) से बचाव के संबंध में आवश्यक सलाह दी गई है।
इस संबंध में बीमार मुर्गियों के सीधे संपर्क में न आयें, दस्ताने या किसी भी अन्य सुरक्षा साधन का इस्तेमाल करें, बीमार पक्षियों के पंख, श्लेषमा (म्यूकस) और बीट को न छूएं, छूएं जाने की स्थिति में साबुन से तुरंत अच्छे तरीके से हाथ धोयें, मुर्गियों को बाड़े में रखें। बर्ड फ्लू रोग के संबंध में अनावश्यक भ्रांतियों व अफवाहों से सावधान रहें। बीमार अथवा मरे हुए पक्षियों की सूचना पशुपालन विभाग की निकटतम संस्था को तुरंत दें।
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