राजा जयसिंह की छतरी : राजस्थानी कलाकृतियों का बेजोड़ नमूना


बुरहानपुर:मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में ताप्ती नदी के तट पर ऐतिहासिक राजा जयसिंह की छतरी का मकबरा है.यह बुरहानपुर के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है.राजा जयसिंह की छतरी का निर्माण उनकी स्मृति में सम्राट औरंगजेब के आदेश से किया गया था.राजा जयसिंह दक्कन में मुगल सेना के सेनापति थे.दक्कन अभियान से अंबर लौटते समय बुरहानपुर में उनकी मृत्यु हो गई.

इतिहासकार बताते हैं किइसी स्थान पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था.इसे लोग राजा की छतरी भी कहते हैं.बुरहानपुर जनपद मुख्यालय से 5 किलोमीटर दूर ताप्ती नदी के तट पर स्थित राजा जयसिंह की छतरी को देखने के लिएदेश ही नहीं विदेश से भी पर्यटक पहुंचते हैं.राजा जयसिंह की छतरी में बहुत सुंदर-सुंदर राजस्थानी कलाकृतियां बनी हुई हैं.पर्यटक इस मकबरे की खूबसूरती को अपने कैमरे में कैद कर यादगार के रूप में लेकर जाते हैं.

राजस्थानी कलाकृतियों का बेजोड़ नमूना है छतरीइतिहासकार मोहम्मद नौशाद ने बताया कि राजा जयसिंह औरंगजेब के समय बुरहानपुर के कमांडर थे.उनका देहांत भी बुरहानपुर में ही हुआ था.राजा जयसिंह की छतरी में राजस्थानी की कलाकृतियां साफ झलकती हैं.इन छतरियों में सीढ़ीदार चबूतरे के चारों ओर का भाग पत्थर की जालियों से बना हुआ है.सुंदर खंभों पर छतरियों का निर्माण किया गया था.जयसिंह की छतरी 20 खंभों पर टिकी हुई है.इतना ही नहीं समाधि के चारों ओर युद्ध,वीरता की आकृतियां बनी हुई हैं.जो राजस्थानी कला का बेजोड़ नमूना है.इसका निर्माण औरंगजेब के आदेश से राजा जयसिंह के पुत्र की देखरेख में हुआ था.छतरी को देखने के लिए हजारों की संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं.

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