बुरहानपुर - नशाखोरी एक ऐसी बीमारी है जो न केवल नशाखोर के लिए बल्कि उसके परिवार और समाज के लिए भी हानिकारक है। नशाखोरी के कारण व्यक्ति की सोच और व्यवहार में परिवर्तन होता है, जिससे वह दूसरों का सम्मान भूल जाता है। उक्त बात श्री सांई नशामुक्ति केंद्र बुरहानपुर के संचालक डॉ मनोज अग्रवाल ने बताते हुए कहा कि नशाखोरी के कारण व्यक्ति की सोच संकीर्ण हो जाती है, वह केवल अपने नशे के बारे में सोचता है और दूसरों की भावनाओं और जरूरतों को नजरअंदाज कर देता है। वह अपने परिवार के सदस्यों, दोस्तों और समाज के लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है, जिससे उनका सम्मान और आदर कम हो जाता है।
नशाखोरी के कारण व्यक्ति का व्यवहार भी बदल जाता है, वह हिंसक और आक्रामक हो जाता है, जिससे दूसरों को उसके साथ रहने में डर लगता है। वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ लड़ाई-झगड़ा करता है, जिससे घर का माहौल खराब हो जाता है।
नशाखोरी के कारण व्यक्ति का आत्मसम्मान भी कम हो जाता है, वह अपने बारे में नकारात्मक सोचता है और अपने जीवन को बर्बाद मान लेता है। वह अपने परिवार और समाज से कट जाता है, जिससे उसे मानसिक और भावनात्मक संकटों का सामना करना पड़ता है।
नशाखोरी के कारण समाज में भी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जैसे कि अपराध, हिंसा और सामाजिक विकार। नशाखोरी के कारण समाज का माहौल खराब हो जाता है, जिससे लोगों को डर और असुरक्षा का अहसास होता है।
इसलिए, नशाखोरी से बचना और दूसरों का सम्मान करना बहुत जरूरी है। हमें अपने जीवन में अनुशासन और संयम लाना होगा, ताकि हम अपने सपनों को पूरा कर सकें और अपने परिवार और समाज के साथ अच्छे संबंध बना सकें।
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