बुरहानपुर - नशा एक ऐसी बीमारी है जो न केवल व्यक्ति को बर्बाद करती है, बल्कि उसके परिवार को भी तबाह कर देती है। नशे की लत से व्यक्ति की सोच और व्यवहार में बदलाव आता है, जिससे वह अपने परिवार के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर पाता है। उक्त बात श्री सांई नशामुक्ति केंद्र के संचालक डॉ मनोज अग्रवाल ने बताते हुए कहा कि नशे के कारण परिवार में कलह और तनाव बढ़ता है, जिससे परिवार के सदस्यों के बीच रिश्ते खराब होते हैं। नशे की लत से व्यक्ति अपने परिवार की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता है, जिससे परिवार के सदस्यों को आर्थिक और भावनात्मक रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
नशे के कारण परिवार के बच्चों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। वे अपने माता-पिता के व्यवहार को देखकर नकारात्मक सोच विकसित कर लेते हैं और अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं।
नशे के खिलाफ लड़ने के लिए हमें परिवार के सदस्यों को जागरूक करना होगा और उन्हें इसके हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करना होगा। हमें नशे के आदी व्यक्ति को नशा मुक्ति केंद्रों में भेजना होगा और परिवार के सदस्यों को एक दूसरे के साथ मिलकर इस बुराई से लड़ने में मदद करनी होगी।
इसके अलावा, हमें परिवार के लिए स्वस्थ विकल्प प्रदान करने होंगे, जैसे कि परिवारिक गतिविधियाँ और सामाजिक कार्यक्रम। हमें परिवार के सदस्यों को एक दूसरे के साथ जुड़ने और अपने रिश्तों को मजबूत बनाने में मदद करनी होगी।
केवल तभी हम नशे के खिलाफ लड़ सकते हैं और परिवारों को इस बुराई से मुक्त कर सकते हैं। हमें परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करना होगा और उन्हें एक सुखी और स्वस्थ जीवन जीने में मदद करनी होगी।
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