वकील लोग काला कोट क्यों पहनते हैं , क्या वजह हैं वकीलों के काला कोट पहनने के पीछे ?



हम अक्सर देखते हैं कि वकील और जज काला कोट पहनते हैं , यहाँ तक कि वह गर्मियों में भी पहनते हैं । 
सन 1327 एडवर्ड तृतीय द्वारा वकालत की शुरुआत की गई थी और उस समय ड्रेस कोड के आधार पर न्यायाधीशों की वेशभूषा तैयार की गई थी। 
जज अपने सर पर एक बालों वाला विग पहनते थे। वकालत के शुरुआती समय में वकीलों को चार भागों में विभाजित किया गया था जो कि इस प्रकार थे- स्टूडेंट (छात्र), प्लीडर (वकील), बेंचर और बैरिस्टर।
बात वर्ष 1694 की हैं । जब ब्रिटेन की महारानी क्वीन मैरी की चेचक से मृत्यु हो जाती हैं । इसके बाद उनके पति राजा विलियम्स ने सभी न्यायधीशों और वकीलों को सार्वजनिक रुप से शोक मनाने के लिए काले गाउन पहनकर इकट्ठा होने का आदेश दिया। इस आदेश को कभी भी रद्द नहीं किया गया, जिसके बाद से आज तक यह प्रथा चली आ रही है कि वकील काला गाउन पहनते हैं।
अधिनियम 1961 के तहत अदालतों में सफेद बैंड टाई के साथ काला कोट पहन कर आना अनिवार्य कर दिया गया था। 

आइए जानते हैं काले रंग से जुड़ी कुछ बाते - 

◆ काला रंग दृष्ठिहीनता का प्रतीक माना जाता है, वैसे भी ये कहा जाता है कि कानून अंधा होता है, क्योंकि दृष्टिहीन व्यक्ति किसी के साथ पक्षपात नहीं करता। काले कोट पहनने का मतलब है कि वकील बिना पक्षपात किसी अपना केस लड़े।

◆ काले रंग को ताकत और अधिकार का प्रतीक माना जाता है।

◆ काला कोट अनुशासन आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है।





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