औद्योगिक इंदौर के जनक कहे जाने वाले श्रीमंत तुकोजीराव होलकर द्वितीय पर विशेष लेख


औद्योगिक इंदौर के जनक कहे जाने वाले श्रीमंत तुकोजीराव होलकर द्वितीय पर विशेष लेख

जन्म 3 मई 1835, करंजी खर्द
मृत्यु की 17 जून 1886, महेश्वर

 शासन अविधि ( 1844-1886)

महराजा तुकोजीराव द्वितीय का राज्याभिषेक-उत्सव सन्‌ 1844 27 जून को हुआ। इस समय 21 तोपों की सलामी हुईं

होल्कर राज्यवंश में महाराजा तुकोजीराव द्वितीय एक असाधारण प्रतिमाशाली नरेश थे। 
आप उत्कृष्ट श्रेणी के बुद्धिमान राजनीतिज्ञ थे। राज्य-प्रबन्ध करने की आप में अच्छी योग्यता थी। 
महाराजा मल्हारराव होलकर को इन्दौर जैसे महान और विशाल राज्य की नीव डालने का यश प्राप्त है। देवी अहिल्या बाई होलकर ने अपने दिव्यचरित्र, अलौकिक पुण्य तथा अनेक सदगुणों के कारण भारत में अपना नाम अमर कर गई है। 
महाराजा यशवन्तराव ने अपनी वीरता और समय सूचकता से इन्दौर-राज्य की महानता को अक्षय रखने का गौरव प्राप्त किया। पर तुकोजीराव द्वितीय ने सन्‌ 1818 की की घटी हुईं रियासत को उन्नति और समृद्धि के ऊँचे शिखर पर पहुँचाने का श्रेष्ठ गौरव प्राप्त किया।

कुशल प्रशासक श्रीमंत तुकोजीराव द्वितीय ने अपने शासन काल में शिक्षा के प्रचार के लिए जगह-जगह प्राथमिक व संस्कृत शालाएं खोली माध्यमिक के बाद हाई स्कूल यहां से मुंबई विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में विद्यार्थी शामिल होने लगे जनता के ज्ञान वर्धन के लिए सन 1854 में लाइब्रेरी स्थापित की तथा प्रेस की शुरूवात हिंदी में करी मालवा अखबार निकाला।
इंदौर की जनता के पेयजल हेतु तालाब की खुदाई कराकर पिपलियापाला तालाब बनाकर जल आपूर्ति की सन 1855 में नल द्वारा नगर में जल वितरण करने की व्यवस्था की स्वच्छता व स्वास्थ्य के लिए इंदौर नगर में म्युनिसिपालिटी स्थापित की
सन 1864 में किसानों की उपज बढ़ाने के लिए 40 लाख व्यव किए इनसे तालाब का निर्माण कर सिंचाई सुविधा बढ़ाई इंदौर, महेश्वर, खरगोन, कन्नौद और रामपुरा में बड़े औषधालय खोले गए गांव में वेदों की नियुक्ति की गई।
महाराजा का विचार था कि जब अंग्रेज हमारे कपास से कपड़ा बनाकर अपार धन कमा सकते हैं तो हम लोग कपड़ा उद्योग क्यों नहीं चला सकते उन्होंने राज्य की जनता के रोजगार, व्यापार, व्यवसाय और उद्योग को मुंबई जैसा विकसित करने के लिए तथा मालवा और निमाड़ में कपास के व्यापक उत्पादन को ध्यान में रखकर इंदौर में कपड़ा मिल खोलने का निश्चय किया वर्तमान गांधी हाल के पीछे स्टेट कपड़ा मिल का निर्माण शुरू हुआ कपड़ा मिल की नई भारी मशीनों को खंडवा तक तो रेलगाड़ी से लाया गया फिर खंडवा से इंदौर तक इन भारी मशीनों को हाथियों की पीठ पर लादकर लाया गया स्वदेशी कपड़ा मिल का शुभारंभ कर महाराजा ने स्वदेशी आंदोलन को प्रोत्साहित किया यह भी गौरव की बात है कि उस समय वस्त्र उद्योग में भारत का विश्व में चौथा स्थान था महाराज स्वयं अपनी मिल के बने कपड़े पहनते थे अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी उनका अनुकरण किया।

अंग्रेजों को कर्ज़ देकर इंदौर में रेलवे लाइन में डलवाई जिसका भारतीय इतिहास में कोई दूसरा उदाहरण नहीं है।
सन 1870 में इंदौर राज्य के विकास के लिए इंदौर को खंडवा रेलवे से जोड़ना जरूरी था अंग्रेज सरकार और रेलवे ने धन का अभाव बताया तो महाराज अंग्रेज सरकार को एक करोड रुपया उधार दिया और राज्य की जमीन निशुल्क दी सन 1877 में खंडवा से इंदौर तक रेल लाइन शुरू हुई इसका नाम होलकर स्टेट रेलवे था मुनाफे में आधा हिस्सा होलकर राज्य को जाता था।

महाराज के सुशासन में राज्य की आय 85 लाख थी व संख्या 10 लाख थी राज्य में इतना रुपया था कि महाराज ने व्यापारियों को धन कर्ज पर देकर उनके उद्योग धंधों को व्यवस्थित किया और उन्हें दिवालिया होने से बचाया सन 1872 में महाराज ने बड़वाह में नर्मदा पुल का शिलान्यास किया।

महाराज एक कुशल प्रशासक और बुद्धिमान राजनीतिक के थे, वे एक शोकिन पाठक भी थे और प्रत्येक नई खबर की जानकारी रखते थे, वह प्रत्येक विषय पर गंभीरता से शोध पूर्ण व सारगभिर्त विचारों को प्रकट करते थे, साथ ही वह समालोचना करने में सिद्धहस्त थे और एक कुशल वक्ता थे।
सन 1882 मैं महाराजा महारानी सहित श्रीबद्रीनारायण की तीर्थ यात्रा करने गए थे सन 17 जून 1886 को महाराज तुकोजीराव होलकर परलोक वासी हो गए इंदौर कृष्णपुरा में उनकी भव्य छतरी बनी हुई है।

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