शिव अपने शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म ? क्या हैं इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण?


भस्म चढ़ाने के पीछे का आध्यामिक कारण और शरीर पर इसे लगाने से मिलते हैं कौन से फायदे।

क्या हैं इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक कारण ?

शिव के शरीर पर भस्म लपेटने का अर्थ यह है कि मानव जिस शरीर पर इतना घमंड करता है वह क्षणभंगुर है मतलब कभी भी यह नष्ट हो सकता है। दिनभर जिसकी सुख-सुविधा के लिए मानव न जाने क्या-क्या करता है और अपनी खूबसूरत पर घमंड करता है वह सब एक दिन चले जाना है, भस्म के समान हो जाना है। तो इस पर इतना घमंड न करें।

भस्म लगाने के फायदे

● - भस्म शरीर के लिए एक तरह से रक्षा कवच की तरह काम करती है।

● - भस्म शरीर की कीटाणुओं से रक्षा करता है और रोमकूपों को ढक लेता है जिस वजह से गर्मियों में न ज्यादा गर्मी लगती है और सर्दियों में न ज्यादा सर्दी।

● - कई तरह के छोटे जीवाणु जैसे मच्छर, खटमल, मक्खी आदि शरीर से दूर रहते हैं।

● - भस्म त्वचा संबंधी रोगों के लिए किसी दवा से कम नहीं है।

● - माथे पर भस्म लगाने से आज्ञाचक्र जागृत होता है। मन के गंदे विचार शांत होते हैं। मानसिक शांति का एहसास होता है।

● - गले में भस्म लगाने से विशुद्ध चक्र जागृत होता है। सीने के मध्य लगाने से अनाहत चक्र जागृत होता है। जो हमारे शरीर को कई तरीकों से लाभ पहुंचाते हैं।

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