इस मंदिर का नाम है जटोली शिव मंदिर। कहा जाता है जटोली शिव मंदिर राजगढ़ रोड पर सोलन से करीब 7 किलोमिटर दूरी पर स्थित हैं। आप सभी को बता दें कि दक्षिण द्रवीड शैली में बना यह मंदिर कला का बेजोड़ नमूना है। जी हाँ और इस मंदिर को बनने में ही करीब 39 साल का समय लगा था। आप सभी को बता दें कि इस मंदिर में तीन गुंबद हैं और सबसे ऊंचे गुंबद को शिखर कहा जाता है।
वहीं दूसरे सर्वोच्च गुंबद को विमना कहा जाता है, और तीसरे को सबसे कम ऊंचाई वाले को त्रिशूल कहा जाता है। यहाँ पहले गुंबद में, भगवान गणेश की मूर्ति हैं, जबकि दूसरे गुंबद में शेष नाग की मूर्ति है। आपको बता दें कि मंदिर के तीनों गुंबद में कई प्रसिद्ध हिंदू भगवान और देवी की नक्काशी की गई है। केवल यही नहीं बल्कि सोलन में जटोली मंदिर का एक और आकर्षण इसकी ऊंचाई है जो लगभग 111 फीट है, इसी के चलते इसे एशिया में सबसे ऊंचा माना जाता है। इस मंदिर का नाम 'जटा' से लिया है, जो आगे भगवान शिव के लंबे जटाओं को दर्शाता है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि यहां पत्थर को थपथपाने पर डमरू जैसी ध्वनि आती हैं।
वैसे इस मंदिर से जुड़ी कुछ दंतकथाएं हैं, और उनमें से एक है कि ''पौराणिक समय में भगवान भालेनाथ यहां पर कुछ समय के लिए रुके थे। 1950 में एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस यहां पर आएं। कहा जाता हैं कि यहां के लोग पानी की समस्या से जुझ रहे थे और लोगों को बहुत दूर से पानी लाना पड़ता था। इसलिए स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने भगवान शिव की घोर तपस्या की और त्रिशूल के प्रहार से जमीन से पानी निकाला। लोगों का कहना हैं की, तब से लेकर आज तक जटोली में कभी भी पानी की कोई समस्या नहीं हुई।''