सोमनाथ ज्योतिर्लिंग -यह नाम क्यों पड़ा ? इस मंदिर को कितनी बार लुटा गया और क्यों ?

मान्यता है कि स्वयं चंद्रदेव ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। चंद्रमा का एक नाम सोम भी है, इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा। 
इस मंदिर में इतना सोना लगा था कि दुनिया के सभी लोग आश्चर्य करते थे और यही कारण था कि इसको लूटने के लिए लुटेरों ने कई बार इस पर हमला किया।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें-
1.
 यह तीर्थस्थान देश के प्राचीनतम तीर्थस्थानों में से एक है और इसका उल्लेख स्कंदपुराण, श्रीमद्भागवत गीता, शिवपुराणम आदि प्राचीन ग्रंथों में भी है।
2. ये मंदिर गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है। इसका शिखर 150 फुट ऊंचा है, जिस पर स्थित कलश का भार दस टन है।
3. इतिहासकारों की मानें तो इस मंदिर को 17 बार नष्ट किया गया और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया।
4. माना जाता है कि सन 1026 में महमूद गजनी ने जो शिवलिंग खंडित किया था, वही आदि शिवलिंग था। मंदिर में फिर से शिवलिंग प्रतिष्ठित किया गया, जिसे सन 1300 में अलाउद्दीन की सेना ने खंडित कर दिया था। इस तरह खंडन और जीर्णोद्धार का सिलसिला चलता रहा।
5. बताया जाता है आगरा के किले में जो देवद्वार हैं, वे सोमनाथ मंदिर के ही हैं। इन्हें महमूद गजनी लूटपाट के बाद अपने साथ ले गया था और आगरा के किले में रखवा दिए थे।


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