इस वर्ष कब मनाया जायेगा बसंत पंचमी का त्यौहार ? ऐसे करें सरस्वती पूजन ... इन चीजों का लगायें भोग

इस साल बसंत पंचमी का पर्व 5 फरवरी 2022 को मनाया जाएगा.

तिथि एवं मुहूर्त

पांच फरवरी दिन शनिवार को उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और सिद्धि योग में बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा. प्रातः 7:35 बजे से 9:03 तक कुंभ लग्न में सरस्वती की मां की आराधना करें. इसके बाद में 10:29 से और 13:59 बजे तक चर लग्न मेष और स्थिर लग्न वृषभ में बहुत ही शुभ मुहूर्त हैं.

पूजन हेतु पूजा सामग्री

मां सरस्‍वती पूजा में पीली और सफेद चीजों का विशेष महत्व होता है. मां सरस्वती की पूजा में सफेद तिल का लड्डू, गन्ना, एवं गन्ने का रस, पका हुआ गुड़, मधु, श्वेद चंदन, श्वेत पुष्प, सफेद या पीले वस्त्र, श्वेत अलंकार, अदरक, मूली, शर्करा, सफेद धान के अक्षत, मोदक, धृत, पके हुए केले की फली का पिष्टक, नारियल, नारियल का जल, श्रीफल, बदरीफल, ऋतुकालोभ्दव पुष्प फल आदि होना चाहिए.

ऐसे करें सरस्वती पूजन

विद्यार्थी अथवा सामान्य व्यक्तियों को भी प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत होकर पीले वस्त्र धारण करें. मस्तक पर पीला तिलक लगाएं. सरस्वती मां की प्रतिमा के सामने बैठकर सरस्वती वंदना करें. मां सरस्वती का सफेद अथवा पीले पुष्पों से पूजन करें. तत्पश्चात पीले मिष्ठान से भगवती सरस्वती को भोग लगाएं और मां से विद्या बुद्धि देने की प्रार्थना करें. सरस्वती के मंत्र इस प्रकार हैं. इनमें से किसी एक मंत्र का विशेष जाप किया जा सकता है.

मां सरस्वती को इन चीजों का लगाएं भोग

बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को पूजा के बाद पीली चीजों का भोग लगाना शुभ होता है. मां सरस्वती को पीले मीठे चावल, पीले लड्डू, बेर, केला, बूंदी और मालपुआ का भोग लगा सकते हैं.

मां सरस्वती मंत्र

ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।।

कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्।

वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।।

रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्।

सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।।वन्दे भक्तया वन्दिता च ।।

सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌।

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्‌

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥२॥

Post a Comment

Previous Post Next Post