आप ईश्वर की पूजा में जो भी करें वो मन को कम ही लगता है. यही वजह है कि हर देवी-देवता की आराधना के चलते मंत्रोच्चार, आरती तथा पूजा का तरीका अलग-अलग हो सकता है. भले आप किसी भी ईश्वर की आराधना कर रहे हों, मगर इन सबमें हमेशा एक समान बता रहती हैं तथा जिनको ध्यान में रखकर ही पूजा करनी चाहिए-
1- दिशा का रखें ध्यान:-
आपके घर का मंदिर या फिर पूजा की जगह हमेशा ही ईशान कोण मतलब उत्तर पूर्व दिशा में ही होना चाहिए. यह दिशा ईश्वर के मंदिर के लिए सबसे शुभ मानी जाती है. किन्तु यदि आपके घर में पूजा स्थल दक्षिण पश्चिम दिशा है तो पूजा का फल कम प्राप्त होगा.
2- ऐसे ना करें पीठ:-
जब भी आप पूजा कर रहे हों, तो ध्यान में रखें कि आपका मुंह पश्चिम दिशा की तरफ हो तथा मंदिर या ईश्वर का मुख पूर्व दिशा की तरफ ही हो. इतना ही नहीं देवी-देवताओं की प्रतिमा के समक्ष कभी भी पीठ करके नहीं बैठना चाहिए.
3- आसन का इस्तेमाल:-
अक्सर लोग जमीन पर बैठकर ही पूजा आरम्भ कर देते हैं. मगर ठीक तरीका नहीं होता है, क्योंकि पूजा के वक़्त आसन का इस्तेमाल करना आवश्यक है. ऐसी मान्यता है कि बिना आसन पर बैठे पूजा-पाठ करने से दरिद्रता आती है. इसलिए पूजा के चलते साफ-सुथरे आसन का उपयोग अवश्य करें.
4- मंदिर में जलाएं दिया:-
घर में अगर मंदिर हो या पूजा का कोई भी जगह हो तो वहां पर प्रातः शाम एक दीपक जरूर जलाएं. घर में दिया जलाने से ईश्वर की कृपा बनी रहती है.
5- पंचदेवों की आराधना:-
प्रभु श्री विष्णु, गणेश, महादेव, सूर्य देव तथा देवी दुर्गा को पंचदेव कहा जाता है. ऐसे में प्रतिदिन पूजा करते वक़्त इन पंचदेवों का ध्यान जरूर करना चाहिए. ऐसा करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा ईश्वर की कृपा मिलती है.