किशोर कुमार : यूडलिंग का बादशाह हरफ़नमौला कलाकार...4 अगस्त जन्मदिन पर सुने-अनसुने किस्से

● किशोर कुमार का जन्म 4 अगस्त, 1929 को मध्यप्रदेश के खंडवा में एक बंगाली परिवार में हुआ था। 

● किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था।

● किशोर ने अपने करियर की शुरुआत अपने भाई अशोर कुमार की तरह बॉम्बे टॉकीज से की थी।

● साल 1946 में आई फिल्म शिकारी में पहली बार किशोर कुमार ने अभिनय किया था। इस फिल्म में उनके भाई अशोक कुमार लीड रोल में थे।

● किशोर कुमार हॉलीवुड सिंगर और एक्टर डैनी काय के बड़े प्रशंसक थे। किशोर ने अपने कमरे में उनका पोस्टर भी था।

● भाई अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर कुमार उन्हीं की राह पर एक एक्टर बनें, हालांकि उन्हें अभिनय में दिलचस्पी नहीं थी।

● एक अभिनेता के रूप में 1946 को फिल्म शिकारी से हुई थी. साल 1948 में रिलीज़ हुई फिल्म जिद्दी के लिए किशोर कुमार को पहली बार गाने का मौका मिला।

● किशोर कुमार ने एक दो नहीं बल्कि चार बार शादियां की थीं। पहली वाइफ रुमा गुहा ठाकुरता थीं. दूसरी शादी मधुबाला से हुई और तीसरी शादी योगिता बाली से हुई. किशोर ने चौथी शादी लीना चंदावरकर से की थी.

● लीना चंद्रावरकर जब किशोर की जिंदगी में आईं तो उनसे 20 बरस छोटी थीं. 

● किशोर कुमार के दो बेटे हैं. अमित कुमार, किशोर और रुमा गुहा के बेटे हैं. ये भी फेमस सिंगर हैं. किशोर की चौथी वाइफ लीना से एक बेटे सुमित कुमार हैं. 

● मधुबाला से शादी के लिए किशोर कुमार ने इस्लाम कुबूल कर लिया था। मुस्लिम होने के बाद किशोर कुमार ने अपना नाम करीम अब्दुल रख लिया था।

● किशोर कुमार ने अपने कैंटीन वाले से 5 रुपए 75 पैसे लिए थे, इसी बात से प्रेरित होकर उन्होंने पांच रुपैया बारह आना गाना बनाया था।

● किशोर कुमार के घर के बाहर ‘किशोर कुमार से सावधान’ बोर्ड लगा था।

● सिंगर महिलाओं की आवाज में भी गाना गा लेते थे। एक लड़की भीगी भागी सी में किशोर ने लड़की की आवाज में गाना गाया था।

● एक गायक और अभिनेता होने के साथ किशोर कुमार ने लेखक, निर्देशक, निर्माता और संवाद लेखक तक की भूमिका निभाई। 

● वह लता मंगेशकर की बहुत इज्जत करते थे. लता जितनी फीस लेती उससे हमेशा एक रुपया कम  लिया करते थे.

● किशोर कुमार ने लगभग 15 सौ गाने गाए हैं. किशोर कुमार ने फिल्मों में आने से पहले कभी भी म्यूजिक की ट्रेनिंग नहीं ली थी.

● उन्होंने हिन्दी फ़िल्म उद्योग में बंगाली, हिंदी, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, उड़िया और उर्दू सहित कई भारतीय भाषाओं में गाने गाये हैं।

● उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 8 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते और उस श्रेणी में सबसे ज्यादा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। उसी साल उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 

● उस वर्ष के बाद से मध्यप्रदेश सरकार ने "किशोर कुमार पुरस्कार"(एक नया पुरस्कार) हिंदी सिनेमा में योगदान के लिए चालु कर दिया था।

● 1975 में देश में आपातकाल के समय एक सरकारी समारोह में भाग लेने से साफ मना कर देने पर तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ला ने किशोर कुमार के गीतों के आकाशवाणी से प्रसारित किए जाने पर पर रोक लगा दी थी और किशोर कुमार के घर पर आयकर के छापे भी डाले गए। मगर किशोर कुमार ने आपातकाल का समर्थन नहीं किया। 

● किशोर कुमार ने 1964 में फिल्म दूर गगन की छांव में के जरिये निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखने के बाद हम दो डाकू, दूर का राही, बढ़ती का नाम दाढ़ी, शाबास डैडी, दूर वादियों में कहीं, चलती का नाम जिंदगी और ममता की छांव में जैसी कई फिल्मों का निर्देशन भी किया।

● फिल्म 'प्यार किए जा' में कॉमेडियन मेहमूद ने किशोर कुमार, शशि कपूर और ओमप्रकाश से ज्यादा पैसे वसूले थे। किशोर को यह बात अखर गई। इसका बदला उन्होंने मेहमूद से फिल्म 'पड़ोसन' में लिया- डबल पैसा लेकर।

● किशोर कुमार ने जब-जब स्टेज-शो किए, हमेशा हाथ जोड़कर सबसे पहले संबोधन करते थे-'मेरे दादा-दादियों।' मेरे नाना-नानियों। मेरे भाई-बहनों, तुम सबको खंडवे वाले किशोर कुमार का राम-राम। नमस्कार।

● किशोर कुमार का बचपन तो खंडवा में बीता, लेकिन जब वे किशोर हुए तो इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ने आए। हर सोमवार सुबह खंडवा से मीटरगेज की छुक-छुक रेलगाड़ी में इंदौर आते और शनिवार शाम लौट जाते। सफर में वे हर स्टेशन पर डिब्बा बदल लेते और मुसाफिरों को नए-नए गाने सुनाकर मनोरंजन करते थे।

● किशोर कुमार यूडलिंग का प्रयोग अपने गानों में करते थे। इसके बाद यूडलिंग का अंदाज गायकों के लिए फैशन बन गया।

● वर्ष 1987 में किशोर कुमार ने निर्णय लिया कि वह फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वापस अपने गांव खंडवा लौट जायेंगे। वह अक्सर कहा करते थे कि दूध जलेबी खायेंगे, खंडवा में बस जायेंगे। लेकिन उनका यह सपना अधूरा ही रह गया। उन्हें 13 अक्टूबर 1987 को दिल का दौरा पड़ा और वह इस दुनिया को अलविदा कह गये।


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