क्या आप भी पीते हो खड़े होकर पानी ? : तुरंत छोड़ें ये आदत वरना सेहत पर पड़ सकते हैं ये बुरे प्रभाव

पानी का सेवन मनुष्य के जीवन के लिए अतिआवश्यक है किंतु गलत तरीके से पानी पीने से सेहत को फायदा नहीं बल्कि नुकसान होता है। यह बात कम लोगों को पता होती है कि व्यक्ति जिस पोजीशन में पानी पीता है उसका भी अच्छा और बुरा असर उसकी सेहत पर पड़ता है। आयुर्वेद में खड़े होकर पानी पीने की मनाही है।
अगर आप भी रोजाना फ्रिज से बोतल निकालकर एक ही घूंट में खड़े-खड़े पानी पी लेते हैं तो आज से एेसा करना बंद कर दें। नहीं तो आपकी यही आदत आपके लिए खतरनाक बन सकती है।

आईये जानते हैं खड़े होकर पानी पीने के नुकसान-


● ऑक्सीन सप्लाई रुक जाती है-

खड़े होकर पानी पीने से फूड और विंड पाइप में होने वाली ऑक्सीजन की सप्लाई रुक जाती है। जिसका असर न केवल फेफड़ों पर बल्कि दिल पर भी पड़ता है।

● हर्निया की शिकायत -

खड़े होकर पानी पीने से पेट के निचले हिस्से की दीवारों पर दबाव बनता है, जिससे पेट के आसपास के अंगों को बहुत नुकसान पहुंचता है। इस बुरी आदत के चलते कई लोगों को हर्निया का शिकार होना पड़ता है।

● जोड़ों में दर्द -

खड़े होकर पानी पीने की आदत की वजह से पानी का बहाव तेजी से आपके शरीर से होकर जोड़ों में जमा हो जाता है। जिसकी वजह से हड्डियों और जोड़ों पर बुरा असर पड़ता है। हड्डियों के जोड़ वाले हिस्से में तरल पदार्थ की कमी की वजह से जोड़ों में दर्द के साथ हड्डियां कमजोर होना शुरू हो जाती हैं। कमजोर हड्डियों के चलते व्यक्ति गठिया जैसी बीमारी से पीड़ित हो सकता है।

● किडनी पर बुरा असर -

जब कोई व्यक्ति खड़े होकर पानी पीता है, तो पानी बिना फिल्टर हुए निचले पेट की तरफ तेजी से बढ़ता है। जिसकी वजह से पानी में जमा अशुद्धियां पित्ताशय में जमा हो जाती हैं। जो किडनी के लिए बहुत हानिकारक होती हैं।

●  नहीं बुझती प्यास -

खड़े होकर पानी पीने से भले ही पेट भर जाए लेकिन व्यक्ति की प्यास नहीं बुझती है। प्यास बुझाने के लिए बैठकर पानी के छोटे-छोटे घूंट पिएं। साधारण भाषा मे पानी गट गट कर नहीं बल्कि सिप सिप कर पियें।

● पाचनतंत्र की समस्या -

व्यक्ति जब बैठकर पानी पीता है तो मसल्स और नर्वस सिस्टम रिलैक्स होती हैं और पानी आसानी से पच जाता है। जबकि खड़े होकर पानी पीने से अपच की समस्या पैदा होती है।

● एसिड स्तर का प्रभाव -

खड़े होकर या जल्दी में पानी पीने से शरीर में एसिड का स्तर कम नहीं होता। इसलिए हमेशा पानी शांत बैठकर पीना चाहिए।

खांसी या सांस की तकलीफ -

खड़े होकर पानी पीने वालों को सांस/खांसी की तकलीफ होने की आशंका होती है। असावधानी से यदि श्वांस नलिका में पानी जाता है, तो अनेक स्थायी स्वरूप के विकार भी हो सकते हैं। आहार और श्वांस नलिका के बीच तालमेल के अभाव के कारण अनेक विकार हो सकते हैं।

गैस्ट्रोइसोफेगल गैस्ट्रिक रिफ्लक्स की बढ़ोतरी -

खड़े होकर पानी पीने से आमाशय में एकाएक गए पानी के कारण एसिड ऊपर की ओर उछलता है और आमाशय ग्रसनी के बीच के वॉल्व पर पर्याप्त दुष्प्रभाव पड़ता है। इसके चलते इस वॉल्व की कार्यक्षमता कम हो जाती है और वह ठीक तरह से बंद नहीं हो पाता। इस कारण छाती में जलन की शिकायत के साथ-साथ कई बार मुंह से खाना भी आ जाता है। 

Disclaimer : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


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