राजघाट स्थित प्राचीन शनि मंदिर : बरसात के दिनों में बहन ताप्ती ऊपर मंदिर तक चली आती है भाई शनि से मिलने

सूर्यपुत्री माँ ताप्ती के तट पर राजघाट पर स्थित शनि मंदिर शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल हैं। यहां हर दिन श्रद्धालुओं की दर्शन के लिए भीड़ रहती है। खासकर शनिवार को तो सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है।

मंदिर को किसने और कब बनाया यह तो दावे के साथ कोई नहीं बता सका, लेकिन यहां मौजूद पुजारी फ़कीरा शिंदे ने कहा कि लगभग 200 साल से अधिक समय से यहां मंदिर का हमें पता है, पूर्व में कब से है इसकी सही जानकारी बता पाना मुश्किल है।

सूर्य पुत्री ताप्ती नदी में स्नान करने व दर्शन को आने वाला हर भक्त यहां बने शनि मंदिर के दर्शन जरूर करता है। क्योंकि शनि देव माँ ताप्ती के भाई हैं। इसलिए माँ के दर्शन के बाद भाई शनि देव के दर्शन का बहुत पूण्य मिलता है।

यहां मंदिर की ख़ास विशेषता यह है कि यहाँ एक ही पत्थर पर दो मूर्तियाँ बनी हुई हैं। एक तरफ शनि देव की मूर्ति है तो उसी पत्थर पर दूसरी तरफ हनुमानजी की मूर्ति है। ऐसा कहीं भी देखने को नहीं मिलता।

ताप्ती नदी की महिमा प्राचीन पुराणों व धर्म ग्रंथों में बताई गई है , कि भगवान जटाशंकर भोलेनाथ की जटा से निकली भगीरथी गंगा मैया में 100 बार स्नान का, देवाधिदेव महादेव के नेत्रों से निकली 1 बूंद से जन्मीं शिव पुत्री कही जाने वाली मां नर्मदा के दर्शन का तथा मां ताप्ती के नाम का स्मरण एक समान पुण्य एवं लाभ देता है। 

मंदिर के पुजारी बताते है कि सूर्यपुत्री ताप्ती नदी के किनारे कई ऋषियों मुनियों और साधु संतों ने तपस्या की और वे पूजा करने के लिए शिव लिंग की स्थापना किया करते थे। 

कहा जाता है कि ताप्ती नदी किनारे स्थित शिवमंदिर भी उन्ही मंदिरों में से एक है। जिसे प्राचीनतम समय में बनाया है।  

सावन माह में यहां भक्त प्रतिदिन सुबह शाम आराधना करने के लिए हैं। साथ ही यहां  विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुआ करते हैं। मंदिर पर प्रतिदिन सुंदरकांड आरती होती है। 

श्रावण में सोमवार के दिन मंदिर में दिनभर हवन पूजन किया जाती है। भक्त राजेंद्र चौहान ने बताया कि मंदिर अतिप्राचीन है। यहां आने वाले भक्त की हर मुरादे पूरी होती हंै। सावन के महीने में मंदिर पर भक्तों की भीड़ हुआ करती है।

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