11 जुलाई-विश्व जनसंख्या दिवस : बढ़ती जनसंख्या भारत के लिये कितनी बड़ी चुनौती

वर्ल्डोमीटर्स के मुताबिक, इस समय दुनिया की कुल जनसंख्या सात अरब 87 करोड़ 85 लाख से भी अधिक है।

दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश चीन है, जबकि दूसरे स्थान पर भारत है। चीन की जनसंख्या जहां एक अरब 44 करोड़ से अधिक है, तो वही भारत की जनसंख्या एक अरब 39 करोड़ से अधिक है।

एक अनुमान के मुताबिक भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं। अगर इसी रफ्तार से हमारी आबादी बढ़ती रही तो आने वाले 10 साल में भारत दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होगा।

इस साल विश्व जनसंख्या दिवस 2021 की थीम 'कोविड-19 महामारी का प्रजनन क्षमता पर प्रभाव' है।

इसका उद्देश्‍य दुनियाभर में बढ़ती आबादी से जुड़ी समस्‍याओं के प्रति लोगों को जागरुक करना है. हमारे देश के लिए भी बढ़ती आबादी कई समस्‍याओं का कारण बनती जा रही है. इसकी वजह बर्थ कंट्रोल से जुड़ी जानकारियों का अभाव भी माना जाता है. बढ़ती आबादी की इसके अलावा भुखमरी की भी बड़ी वजह है.

देश में जनसंख्या विस्फोट ने हमारे विकास को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है. जितनी बड़ी देश की जनसंख्या, उतनी बड़ी समस्याएं. इसलिए बढ़ी हुई जनसंख्या को कम करना हमारे लिए बेहद आवश्यक है. चाहे वह विश्व हो या भारत की जनसंख्या, लंबे समय के विकास और संसाधनों पर समान वितरण के लिए इसपर नियंत्रण करना जरूरी है.

जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरुक करने के लिए इस दिन को मनाया जाता है. लैंगिक समानता, परिवार नियोजन, गरीबी, नागरिक अधिकार, मां और बच्चे का स्वास्थ्य, गर्भनिरोधक दवाओं के इस्तेमाल से लेकर यौन जैसे सभी गंभीर विषयों विचार विमर्श होता है. 

विश्व जनसंख्या दिवस का इतिहास

11 जुलाई को सालाना पूरे विश्व में विश्व जनसंख्या दिवस के रुप में एक महान कार्यक्रम मनाया जाता है। पूरे विश्व में जनसंख्या मुद्दे की ओर लोगों की जागरुकता को बढ़ाने के लिये इसे मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद के द्वारा वर्ष 1989 में इसकी पहली बार शुरुआत हुई।

कैसे बिगड़ रहा है जनसंख्या संतुलन

बढ़ती जनसंख्या की समस्या के कारण उत्पादन में वृद्धि के बावजूद भी भोजन की उपलब्धता में कमी आ रही है ।

भोजन की गुणवत्ता और असमान वितरण के कारण भूख और मृत्यु ।

बढ़ती जनसंख्या के प्रति व्यक्ति चिकित्सा व शिक्षा की सुविधाएं और सेवाएं घट रही हैं ।

लगातार बिजली और पीने योग्य पानी की कमी बढ़ती जा रही है ।

जहां एक ओर सरकार के कर्ज में वृद्धि हो रही है, वहीं महंगाई  भी बढ़ती जा रही है ।

रोजगार के अवसर घट रहे हैं और विकास का लाभ लोगों को नहीं मिल पाता है ।

औद्योगिक और शहरी कचरा  बढ़ रहा है, साथ ही वायु प्रदूषण बढ़ रहा है ।

जनसंख्या विस्फोट से प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो रही है, वहीं ग्लोबल वार्मिंग का असर बढ़ने प्रकृति का ऋतु चक्र बिगड़ गया है । उत्तराखण्ड जैसी प्राकृतिक आपदाएं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है ।


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