मानसिक रोग आपको या किसी को भी हो सकता है, जानें...ये कितने तरह के होते हैं? इसे कैसे पहचानें

मनोरोग (Mental Illness) जिन्हें मानसिक विकार और दिमाग की बीमारी भी कहा जाता है, आपकी भावनाओं, व्यवहार, मूड और सोचने की क्षमता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। इनकी वजह से धीरे-धीरे आपकी दैनिक दिनचर्या पर असर पड़ता है और यहां तक कि एक दिन आपकी जिंदगी को यह बहुत बड़े पैमाने पर नियंत्रित करने लगता है। मनोरोग इतना खतरनाक हो सकता है, कि यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। 


मनोरोग के प्रकार और उदाहरण के बारे में जानते हैं…

डिप्रेशन या अवसाद मनोरोग

डिप्रेशन या अवसाद मनोरोग सबसे आम दिमागी बीमारी है। जो न सिर्फ आपको व्यवहारत्मक और भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है, बल्कि आपकी दैनिक कार्यक्षमता के ऊपर भी बुरा असर डालता है। आजकल इस मनोरोग से महिलाओं, पुरुष या बच्चे कोई भी अछूता नहीं रहा है। 

इस बीमारी ग्रसित व्यक्ति उदास, आत्मगिलानी, दिलचस्पी में कमी, खुद को कम आंकना, अपर्याप्त नींद, थकान और ध्यान में कमी की समस्याओं का सामना करता है। 

अवसाद मनोरोग के उपचार के लिए कई थेरेपी मौजूद हैं, जिनकी मदद से इसे कम या खत्म किया जा सकता है। इसके अलावा, एक्सरसाइज करने से भी डिप्रेशन से राहत मिलती है।

डिमेंशिया (Dimentia)/ भूलने की दिमागी बीमारी

जिसमें, व्यक्ति की याद्दाश्त बहुत कमजोर हो जाती है और वह चीजें भूलने लगता है। कई बार, डिमेंशिया से ग्रसित व्यक्ति की हालत इस स्तर तक भी पहुंच सकती है कि, वह अपने परिवार के लोगों का नाम व शक्ल या फिर खुद का नाम व अस्तित्व भी भूल सकता है। इसके अलावा, इस दिमाग की बीमारी में सोचने, गणित करने, याद करने, बोलने आदि की क्षमता भी कम हो सकती है। 

यह मनोरोग अल्जाइमर या स्ट्रोक जैसी कई बीमारी या दिमाग पर चोट लगने की वजह से हो सकता है। 

ऑटिज्म (Autism) 

यह मेंटल डिसऑर्डर आमतौर, पर बच्चों में शुरू होता है, जो कि व्यक्ति के जवान होने या जिंदगीभर तक रह सकता है। सेंट्रल नर्वस सिस्टम के मैच्योर होने में कमी या देरी होना इस मनोरोग का कारण हो सकता है। ऑटिज्म जैसे विकासात्मक विकार में व्यक्ति के सामाजिक व्यवहार, बात करने की क्षमता या भाषा या कार्यक्षमता या दिलचस्पी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस दिमाग की बीमारी में परिवार द्वारा की गई देखभाल काफी जरूरी और महत्वपूर्ण होती है।

बायपोलर डिसऑर्डर

इस मनोरोग में मूड के मुताबिक मैनिक और डिप्रेसिव एपिसोड देखने को मिल सकते हैं। जिसमें, चिड़चिड़ापन, ओवर एक्टिविटी, रैपिड स्पीच, इंफ्लेटेड सेल्फ एस्टीम और नींद की कमी शामिल हो सकती है। जिन लोगों को सिर्फ मैनिक अटैक ही आते हैं, उन्हें भी बायपोलर डिसऑर्डर हो सकता है। 

स्किजोफ्रेनिया या अन्य साइकोटिक डिसऑर्डर

स्किजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक विकार है, जिसने दुनियाभर में करीब 2 करोड़ लोगों को शिकार बना रखा है। 

इस बीमारी में व्यक्ति के नजरिए, भावनाओं, भाषा, व्यवहार और सेल्फ सेंस से संबंधित विकृतियां हो जाती हैं। इसके अलावा, स्किजोफ्रेनिया जैसे मनोरोग में भ्रम व जो चीज नहीं है, उन्हें सुनने, देखने या महसूस करना आम लक्षण होता है। यह व्यक्ति को किसी भी जगह सामान्य नहीं रहने देता। 

इस समस्या में दवाइओं के साथ साइकोसोशल सपोर्ट प्रभावशाली होता है। ऐसे मनोरोग किशोरावस्था के आखिरी चरण से लेकर शुरुआती जवानी के दौरान होने का ज्यादा खतरा होता है।

सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर

सोशल एंग्जायटी डिसऑर्डर को सोशल फोबिया भी कहा जाता है, जो कि सामाजिक स्थितियों की वजह से होने वाला डर होता है। 

इस मनोरोग से ग्रसित व्यक्ति को भीड़ में या दूसरे लोगों के सामने जाने से डर लगता है। उन्हें लगता है कि, लोग उनके प्रति कोई गलत राय न बना लें या लोगों ने उनके प्रति पहले से ही कोई गलत राय बना रखी है। 

ऐसे लोगों को नए लोगों से मिलने या कहीं काम करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।



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