इलेक्ट्रिक शॉक लगने के समय इन बातों का रखें ध्यान -
अगर किसी भी व्यक्ति को इलेक्ट्रिक शॉक लगा है तो उसे नंगे हाथों से न छुएं।
अगर मेन स्विच है तो उसे तुरंत बंद करें।
इमरजेंसी नंबर पर तुरंत कॉल करें।
बिजली बंद होने तक उच्च वॉल्टेज के तार के पास न जाएं।
अगर तार से स्पार्किंग हो रही हो तो करीब 20 फीट की दूरी बनाएं।
प्रभावित व्यक्ति में दिख सकते हैं ये लक्षण -
इंजर्ड पर्सन को अगर हल्का सा इलेक्ट्रिक शॉक लगा है तो ज्यादा समस्या नहीं होगी। अक्सर करंट का जरा सा एहसास होने पर लोग झटके से हाथ हटा लेते हैं। इलेक्ट्रिक शॉक अगर तेज लगा है तो शरीर में गंभीर समस्या हो जाती है और साथ ही कुछ लक्षण भी दिखाई देते हैं।
गंभीर जलन
उलझन महसूस होना
सांस लेने मे तकलीफ होना
हार्ट रिदम प्रॉब्लम
हृदय गति रुकना (कार्डियक अरेस्ट)
मांसपेशियों में दर्द और संकुचन
बेहोश होना
दौरा पड़ना
इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर तुरंत करें ये उपचार -
जब आपके सामने किसी भी व्यक्ति को इलेक्ट्रिक शॉक लग जाए तो तुरंत प्राथमिक उपचार करना बहुत जरूरी होता है। इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने के साथ ही अन्य बातों पर भी ध्यान देना जरूरी होता है।
व्यक्ति को इलेक्ट्रिक शॉक लगने पर तुरंत मेन स्विच बंद कर दें। अब पीड़ित व्यक्ति को प्लास्टिक या लकड़ी से बने किसी भी सोर्स से दूर करने का प्रयास करें। अब तुरंत व्यक्ति को सीपीआर देने की कोशिश करें। व्यक्ति को अगर खांसी आ रही है और सांस लेने में दिक्कत हो रही है तो तुरंत सीपीआर देना सही उपाय रहेगा।
इलेक्ट्रिक शॉक लगने से व्यक्ति को ठंड का अनुभव होता है। ऐसे में व्यक्ति को ठंड से बचाने का प्रयास करना चाहिए।
व्यक्ति को जहां भी करंट लगा है, वहां बैंडेज से कवर करें। इसके लिए साफ कपड़े का प्रयोग भी किया जा सकता है। कंबल और तौलिए का उपयोग करना सही नहीं रहेगा क्योंकि ढीले फाइबर जलने के कारण चिपक सकते हैं।
इलेक्ट्रिक शॉक का इलाज कैसे किया जाता है ?
अगर इलेक्ट्रिक शॉक से मामूली चोट लगी है तो इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। अगर इलेक्ट्रिक शॉक गंभीर है तो उसके लिए डॉक्टर को आंतरिक जांच की आवश्यकता होती है।
इलेक्ट्रिक शॉक की तीव्रता के आधार पर उसका ट्रीटमेंट किया जाता है।
सामान्यतः एंटीबाॅयोटिक मरहम और स्टेराइल ड्रेसिंग के साथ ही बर्न ट्रीटमेंट
दर्द की दवा
टिटनेस शॉट
अस्पताल में दो से तीन दिन का स्टे
