बुरहानपुर - बुरहानपुर शहर, मुगल सम्राट शाहजहां और मुमताज महल के अमर प्रेम का साक्षी भी रहा है। यहां मुमताज महल ने जिंदगी का अंतिम समय बिताया था। उनका देहांत 17 जून 1631 में 14वीं संतान को जन्म देने के बाद बुरहानपुर में हुआ था।
मुमताज महल के निधन के बाद उनके मृत शरीर को शाहजहां ने विभिन्न लेप व द्रव्यों से सुरक्षित कर यहां जैनाबाद के आहूखाना के समीप पाइनबाग में रखा था। यहां पर मुमताज महल को 6 माह 10 दिन तक रखा गया था। इसके बाद यहां से आगरा के ताजमहल शिफ्ट किया गया था
आज मुगल सम्राट शाहजहां की पत्नी "मल्लिका ए हिन्द" बेगम मुमताज महल की 390 पुण्यतिथि के अवसर पर आहू खाना के करीब पाइन बाग, जैनाबाद क्षेत्र में बेगम मुमताज की अस्थाई कब्र पर पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ।
इस आयोजन में शहर के इतिहास प्रेमी और इतिहासकारों ने पर्यावरण सुरक्षा की शपथ ली और पौधारोपण किया जिससे शहर के इतिहासिक क्षेत्रों को और खूबसूरत बनाया जा सके इस अवसर पर बेगम मुमताज के साथ-साथ रानी लक्ष्मीबाई को भी श्रद्धांजलि दी गई इतिहास के जानकार मोहम्मद नौशाद, कमरुद्दीन फलक, डॉ. सुभाष माने समाजसेवी मंसूर सेवक, डॉ. मनोज अग्रवाल , अशोक जायसवाल, जावेद मीर,रियाज़ अंसारी,शब्बीर हुसैन,याक़ूब भाई ,एज़ाज़ भाई सहित कई इतिहास प्रेमी उपस्थित रहे।उक्त जानकारी आयोजन समिति के मोहम्मद नौशाद द्वारा दी गयी।