विश्वनाथ प्रताप सिंह (प्रधानमंत्री)
* विश्वनाथ प्रताप सिंह जिन्हें वीपी सिंह के नाम से भी जाना जाता है भारत के आठवें प्रधानमंत्री थे
* विश्वनाथ प्रताप सिंह का जन्म 25 जून 1931 उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद ज़िले में एक राजपूत ज़मीनदार परिवार में (मंडा संपत्ति पर शासन किया) हुआ था
* वह राजा बहादुर राय गोपाल सिंह के पुत्र थे जिनका विवाह 25 जून 1955 को अपने जन्म दिन पर ही सीता कुमारी के साथ सम्पन्न हुआ था इन्हें दो पुत्र रत्नों की प्राप्ति हुई
* विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इलाहाबाद और पूना विश्वविद्यालय में अध्ययन किया था
* वह 1947-1948 में उदय प्रताप कॉलेज, वाराणसी की विद्यार्थी यूनियन के अध्यक्ष रहे
* विश्वनाथ प्रताप सिंह इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्टूडेंट यूनियन में उपाध्यक्ष भी थे
* 1957 में उन्होंने भूदान आन्दोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी
* सिंह ने अपनी ज़मीनें दान में दे दीं इसके लिए पारिवारिक विवाद हुआ, जो कि न्यायालय भी जा पहुँचा था
* वह इलाहाबाद की अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अधिशासी प्रकोष्ठ के सदस्य भी रहे
* सिंह को अपने विद्यार्थी जीवन में ही राजनीति से दिलचस्पी हो गई थी वह समृद्ध परिवार से थे, इस कारण युवाकाल की राजनीति में उन्हें सफलता प्राप्त हुई
* 1969-1971 में उत्तर प्रदेश विधान सभा में पहुंचे और मुख्यमंत्री बने
* उनका मुख्यमंत्री का कार्यकाल 9 जून 1980 से 28 जून 1982 तक ही रहा
* 29 जनवरी 1983 को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री बने और 31 दिसंबर 1984 को वह वित्त मंत्री बने
* बोफोर्स घोटाले के बीच 1989 का लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ कांग्रेस को भारी क्षति हुई उसे मात्र 197 सीटें प्राप्त हुई
* विश्वनाथ प्रताप सिंह के राष्ट्रीय मोर्चा को 146 सीटें मिली वह भाजपा 86 सीट तथा वाम दल 52 सीट के साथ मिलकर प्रधानमंत्री बने
* प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने सिखों के घाव पर मरहम रखने के लिए स्वर्ण मन्दिर की ओर दौड़ लगाई
* व्यक्तिगत तौर पर विश्वनाथ प्रताप सिंह बेहद निर्मल स्वभाव के थे और प्रधानमंत्री के रूप में उनकी छवि एक मजबूत और सामाजिक राजनैतिक दूरदर्शी व्यक्ति की थी
* उन्होंने मंडल कमीशन की सिफारिशों को मानकर देश में वंचित समुदायों की सत्ता में हिस्सेदारी पर मोहर लगा दी
* अस्सी के दशक के आखिरी सालों में 'राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है' नारे के साथ लोग विश्वनाथ प्रताप सिंह देश के आठवें प्रधानमंत्री बने थे.
* लेकिन, मंडल कमीशन की सिफारिशों को देश में लागू करते ही वीपी सिंह सवर्ण समुदाय की नजर 'राजा नहीं, 'रंक' और 'देश का कलंक' में तब्दील हो गए.
* 27 नवम्बर 2008 को 77 वर्ष की अवस्था में वी. पी. सिंह का निधन दिल्ली के अपोलो हॉस्पीटल में हो गया
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