बुरहानपुर - पर्यावरण को हरा-भरा रखने के लिए लकड़ियों को बचाकर कंडों से होली जलाने को लेकर राजपुरा समिति द्वारा चलाए जा रहे अभियान को सभी लोगों द्वारा सराहा जा रहा है।
होली पर्व पर आज रात्रि 1100 कंडों की होलिका दहन किया जाएगा । पहली बार होली पर होलिका और प्रहलाद की झांकी बनाई गयी है । जो आमजन के लिए आकर्षण का केंद्र है।
स्वामी विवेकानंद गणेश उत्सव समिति के अमोल भगत ने बताया कि , राजपुरा में पिछले पांच साल से होलिका पर्व पर कंडों की होली दहन होती है । इस बार भी आज रात होलिका का दहन होगा ।
वैदिक संस्कृति में होली दहन गोबर के कंडों से होता रहा है । समिति द्वारा भी वैदिक होली का दहन किया जाएगा । इसमें कपूर , इलाइची हवन सामग्री में डाली जाएगी ताकि पर्यावरण पवित्र हो । साथ ही कोरोना महामारी को देखते हुए इसकी समाप्ती के लिए सामूहिक प्रार्थना भी की जाएगी ।
जिले में पहली बार होलिका और भक्त प्रहलाद की झांकी आकर्षण का केंद्र रहेगी । होलिका का दहन हो जाएगा , लेकिन भक्त प्रहलाद की विष्णु भक्ति से वह नहीं जल पायेंगे।
गोबर के कंडे जलाने से खत्म होते हैं नकारात्मक दोष
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गोबर के कंडे काफी लाभकारी होते हैं। घर में यदि इनका उपयोग किया जाए, तो कोई बाधा परेशान नहीं कर सकती। इसमें घी, कपूर, पीली सरसों जलाने से वास्तु दोष दूर होता है। घर में गोबर के कंडे का धुंआ करने से कभी भी नकारात्मक दोष उत्पन्न नहीं होते हैं। विज्ञान से चीजों को समझने वाली नई पीढ़ी को गौवंश से मिलने वाले बेस्ट प्रोडक्ट गोबर से बनने वाले कंडो और गाय की महिमा को भी ऐसे धार्मिक आयोजनों के माध्यम से आसानी से समझाया जा सकता है।