माण्डू उत्सव : एतिहासिक कवि सम्मेलन सम्पन्न... रचनाओं में समाया वसंत का प्रेम और हास्य का रंग तो कहीं देश भक्ति का जज़्बा

मांडू. मांडू महोत्सव की बीती रात संगीत और कवियों के नाम रही। 
प्रेम का हर रूप जैसे साकार हो गया । रूमानियत का जादू श्रोताओं पर छा गया । प्रेम का संयोंग वियोग वाला देहिक रूप हो या राष्ट्र प्रेम का आलौकिक स्वरूप सब कुछ ऐसे प्रकट हो रहा था जैसे मांडू के प्राचीन महलों पर से धवल बादलों के टुकड़े गुज़र रहे हों ।प्रेम दिवस की रात को माण्डू की वादियाँ फिर रूमानियत से भर गयी ।

मांडू उत्सव के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में इस बार सब कुछ प्रेममय था ।प्रेमी प्रेमिकाओं पर आधारित हास- परिहास के क्षेपक हों या भगतसिंह और पुलवामा के शहीदों के बलिदान की पूजा सब उत्साह और उमंग से भरा हुआ था । कुल मिलाकर श्रोता एक अविस्मरणीय रात के साक्षी बने ।  कवि सम्मेलन का शिखर कलश आप के मित्र एवं मांडू उत्सव कवि सम्मेलन के सूत्रधार संदीप शर्मा ने रखा । 

कवियों का स्वागत ज़िलाधीश ने किया । मध्य रात्रि के बाद तक कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्रसाशनिक अधिकारी और आम जन उपस्थित थे । मालवा और निमाड़ के कई शहरों से श्रोता कवि सम्मेलन में आए थे । 

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