शासकीय स्कूलों के शिक्षक बनेंगे स्वास्थ्य दूत, बच्चों को कोरोना के प्रति करेंगे जागरूक

भोपाल। स्कूल से कोरोना संक्रमण से बचाव सहित अन्य स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान लेकर बच्चे घर और अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करेंगे। इसके लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को 'स्वास्थ्य दूत' बनाया जा रहा है, जो विद्यार्थियों को बीमारियों से रोकथाम और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे। स्कूल शिक्षा Lलल्ल अप्रैल से नए सत्र का शुभारंभ करने जा रहा है। अभी हाई स्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल चल रहे हैं। नए सत्र से पहली से आठवीं तक के स्कूलों को भी खोलने की योजना है। ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए स्कूल शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मप्र द्वारा स्कूलों में स्कूल हेल्थ कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके तहत पहले शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। प्रत्येक विकासखंड के प्रायमरी व मिडिल स्कूलों से 240-240 शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर चुना गया है। इनका प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 फरवरी से 25 मार्च तक छह चरणों में 11 मॉड्यूल में चलेगा। इसमें शिक्षकों को कोरोना से बचने के लिए क्या-क्या सावधानियां बरती जाएं और स्वच्छता का कैसे ध्यान रखा जाए, इस संबंध में जानकारी दी जाएगी।
इस कार्यक्रम में प्रत्येक सरकारी स्कूल में दो शिक्षकों को हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर के रूप में चुना जाएगा। इनका काम रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी प्रसारित करना होगा। खासतौर पर कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ये बच्चों को जागरूक करेंगे। ये शिक्षक इस काम में कक्षा प्रतिनिधियों से भी सहयोग लेंगे, जो हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर संदेशवाहक कहे जाएंगे। ये कक्षाओं के विद्यार्थियों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे।

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