मानवता की मिसाल...समाजसेवी राम अग्रवाल ने की मृत्यु उपरांत देह दान की घोषणा


बुरहानपुर - मंजिल तो तेरी यहीं थी, इतनी देर लगा दी आते-आते, क्या मिला तुझे जिंदगी से, अपनों ने ही जला दिया जाते-जाते।’ 
श्मशान घाट के बाहर यह वाक्य लिखा मिल जाता है। लेकिन अपने शहर के कुछ ऐसे दानवीर भी हैं जिन्होंने अपने जीते जी अपना शरीर ही दूसरों के लिए दान कर दिया।
कुछ लोग अपना जीवन मानवता की सेवा भाव के लिए समर्पित कर देते हैं और इसके लिए उन्हें जो चाहे करना पड़े ऐसे ही समर्पण भाव को लेकर राम अग्रवाल संयुक्त कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
यहां वह कोई शिकायत करने नहीं बल्कि मरने के उपरांत अपने शरीर को दान करने के लिए जिला कलेक्टर के पास आवेदन करने पहुंचे।


राम अग्रवाल ने बताया कि उनके द्वारा अपने शरीर का दान किया जा रहा है जब भी मेरी मृत्यु होगी तब वह चाहते हैं कि उनका शरीर साइंस के विद्यार्थियों के लिए रिसर्च के काम आए और मानव समाज के काम आए इसीलिए वह मरणोपरांत अपना शरीर दान करना चाहते हैं इसके लिए बाकायदा इनका परिवार भी इनका सहयोग कर रहा है।
गौरतलब है कि पहले भी बुधवारा के सोमेश्वर मर्चेंट द्वारा अपनी पत्नी का मृत शरीर दान किया गया था अब एक बार फिर किसी और के द्वारा मानव कल्याण के लिए अपना शरीर दान किया जा रहा है।


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