श्मशान घाट के बाहर यह वाक्य लिखा मिल जाता है। लेकिन अपने शहर के कुछ ऐसे दानवीर भी हैं जिन्होंने अपने जीते जी अपना शरीर ही दूसरों के लिए दान कर दिया।
कुछ लोग अपना जीवन मानवता की सेवा भाव के लिए समर्पित कर देते हैं और इसके लिए उन्हें जो चाहे करना पड़े ऐसे ही समर्पण भाव को लेकर राम अग्रवाल संयुक्त कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
यहां वह कोई शिकायत करने नहीं बल्कि मरने के उपरांत अपने शरीर को दान करने के लिए जिला कलेक्टर के पास आवेदन करने पहुंचे।
गौरतलब है कि पहले भी बुधवारा के सोमेश्वर मर्चेंट द्वारा अपनी पत्नी का मृत शरीर दान किया गया था अब एक बार फिर किसी और के द्वारा मानव कल्याण के लिए अपना शरीर दान किया जा रहा है।
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बुरहानपुर समाचार