बुरहानपुर। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर ताप्ती सेवा समिति द्वारा मां ताप्ती के पावन किनारे राजघाट पर “धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन” विषय पर एक सार्थक परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजन, समाजसेवी एवं नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के वक्ता डॉ. मनोज अग्रवाल एवं डॉ. सुभाष माने ने ताप्ती नदी के पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ताप्ती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और सभ्यता की जीवंत धरोहर है। उन्होंने बताया कि ताप्ती, जिसे सूर्यपुत्री के रूप में जाना जाता है, प्राचीन काल से ही जीवनदायिनी और पवित्रता का प्रतीक रही है। इसके तटों ने अनेक ऐतिहासिक घटनाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजकर रखा है।
डॉ. मनोज अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा,
“ताप्ती के घाट केवल पत्थरों के ढांचे नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों की भावनाओं और संस्कारों के साक्षी हैं। इनका संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से जुड़ी रह सकें।”
वहीं डॉ. सुभाष माने ने कहा,
“यदि हम अपनी धरोहरों को नहीं बचाएंगे, तो हमारी पहचान भी धीरे-धीरे मिट जाएगी। ताप्ती नदी और इसके घाटों का संरक्षण केवल प्रशासन का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।”
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों को ताप्ती नदी के घाटों के रखरखाव, स्वच्छता एवं संरक्षण हेतु शपथ भी दिलाई गई। सभी ने एकजुट होकर यह संकल्प लिया कि वे ताप्ती को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
श्री ब्रह्मानंद महाजन द्वारा ताप्ती के इतिहास को बताया गया ।
इस अवसर पर राजीव खेड़कर, राजेश भगत, भूपेंद्र जूनागढ़ ,श्री किशन चोहान,अत्ताउल्लाह खान, डॉक्टर युसूफ खान, रियाज उल हक अंसारी, वरुण चौधरी ,बसंत पाल ,मोहन शाह आदि उपस्थित रहे।
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