संसद की कैंटीन में अब नहीं मिलेगी सब्सिडी...लोकसभा अध्यक्ष ने की घोषणा

नई दिल्ली। संसद की कैंटीन में माननीयों को मिलने वाला सस्ता खाना बंद हो जाएगा। संसद की कैंटीन के लिए सभी तरह की सब्सिडी अब खत्म कर दी गई है। इस कारण कैंटीन में खान-पान महंगा होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि सांसदों और अन्य लोगों को खाने पर मिलने वाली सब्सिडी पर रोक लगा दी गई है। खाने में सब्सिडी खत्म करने को लेकर दो साल पहले भी बात उठी थी। 

लोकसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में सभी दलों के सदस्यों ने एक राय बनाते हुए इसे खत्म करने पर सहमति जताई थी। अब कैंटीन में मिलने वाला खाना तय दाम पर ही मिलेगा। सांसद अब खाने की लागत के हिसाब से ही भुगतान करेंगे। बजट सत्र की व्यवस्था से जुड़ी तैयारियों की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद की कैंटीन की सब्सिडी खत्म किए जाने की बात बताई। माननीयों के खान-पान पर जारी सब्सिडी को लेकर उठने वाले सवालों को देखते हुए पिछले मानसून सत्र में ही इसे खत्म करने का फैसला कर लिया गया था, जो बजट सत्र से लागू हो जाएगा।

संसद की कैंटीन व्यवस्था पहले ही रेलवे की जगह पांच सितारा होटल अशोक का संचालन करने वाली सरकारी कंपनी आइटीडीसी को सौंपा जा चुका है और इसके खान-पान की दर रेलवे की पुरानी कैंटीन से कहीं ज्यादा है। सब्सिडी खत्म होने से लोकसभा सचिवालय को सालाना करीब आठ करोड़ रुपये की बचत होगी।

जानकारी के मुताबिक कैंटीन की रेट लिस्ट में चिकन करी 50 रुपए में तो वहीं वेज थाली 35 रुपए में परोसी जाती है। वहीं थ्री कोर्स लंच की कीमत 106 रुपए निर्धारित है। बात करें साउथ इंडियन फूड की तो संसद में प्लेन डोसा मात्र 12 रुपए में मिलता है। एक आरटीआई के जवाब में 2017-18 में यह रेट लिस्ट सामने आई थी।

29 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा की कार्यवाही सुबह की पाली में तो लोकसभा की बैठक दूसरी पाली में दोपहर बाद होगी। संसद के दोनों सदनों में इस सत्र से प्रश्नकाल फिर से बहाल कर दिया गया है। पिछले सत्र में प्रश्नकाल रोके जाने को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए थे।

स्रोत - संजीवनी टूडे

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