मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि समय-सीमा तय कर विभागीय लक्ष्यों को पूरा करें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों एवं भविष्य को ध्यान में रखते हुए आवश्यतानुरूप महाविद्यालयों का युक्ति-युक्तकरण व्यवस्थित ढंग से किया जाये। इसी तरह एकल संकाय वाले महाविद्यालयों का बहुसंकायी महाविद्यालयों में उन्नयन आवश्यकतानुसार किया जाये। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक विद्यार्थियों को महाविद्यालयों में उपलब्ध सीट के अनुसार प्रवेश दिया जाये।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि 200 शासकीय महाविद्यालयों का इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की कार्यवाही शुरू की जाये, जिससे विद्यार्थियों को वर्चुअल लर्निंग एवं स्मार्ट क्लॉस-रूम जैसी सुविधाएँ मिल सकें। उन्होंने कहा कि 100 से कम विद्यार्थी संख्या वाले 51 शासकीय महाविद्यालयों को निकटस्थ बड़े महाविद्यालयों में विलय करने पर विचार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 37 निजी विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने कहा कि भवनविहीन महाविद्यालयों के लिये किराये से भवन लेने पर विचार किया जायेगा। उन्होंने विभाग के निर्माण कार्यों का लोकार्पण, शिलान्यास एवं हितलाभ वितरण स्थानीय विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही करने के निर्देश दिये।
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने विभागीय गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि 73 प्रतिशत विद्यार्थी शासकीय महाविद्यालयों में प्रवेशरत हैं। इस वर्ष 4.37 लाख विद्यार्थियों ने स्नातक एवं 1.30 लाख विद्यार्थियों ने स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश लिया है। बैठक में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन ने ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन एवं ई-प्रवेश तथा अन्य विभागीय गतिविधियों की जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बोर्डिंग स्कूलों की समीक्षा के दौरान कहा कि फिलहाल जनवरी माह तक बोर्डिंग स्कूल नहीं खोले जायेंगे। फरवरी माह में इनके खोले जाने पर विचार करेंगे, जिसकी जवाबदेही स्कूल प्रबंधन की होगी।