व्यक्तिगत पहचान- आपकी अपनी पहचान क्या है, जिसके आप लोगों को बताते हैं। आपकी धार्मिक मान्यता और आदतें, विश्वास आदि पर्सनल आइडेंटिटी में आते हैं। आमतौर पर लोग इसे सबसे ज्यादा महत्व देते हैं।
पारिवारिक पहचान - आपकी दूसरी पहचान होती है आपकी फैमिली। आमतौर पर ये रिश्ते आपको बने-बनाए मिलते हैं। एक परिवार में आप अलग-अलग भूमिकाओं में होते हैं, जैसे- पिता, पुत्र, बेटी, मां, चाचा, बुआ आदि। ये आपकी पहचान का दूसरा आधार है।
रिश्तों से पहचान - आपकी पहचान का तीसरा आधार है आपका रिलेशन। फैमिली की तरह रिश्ता ये भी है, लेकिन इसे चुनने की आपको आजादी होती है। जैसे- आपके पति, पत्नी, दोस्त, गर्लफ्रैंड, बॉयफ्रैंड आदि। मतलब ऐसे लोग जो आमतौर पर आपकी जिंदगी में सबसे ज्यादा शामिल होते हैं। ये भी आपकी पहचान के आधार होते हैं।
करियर से पहचान - आपकी पहचान का आधार आपका करियर भी होता है। आप क्या काम करते हैं, किनके लिए काम करते हैं या उस काम को समाज किस तरह देखता है इस आधार पर आपकी एक आइडेंटिटी तय होती है।
सामाजिक पहचान - अंत में आता है आपका सामाजिक दायरा। ये भी आपकी पहचान होता है। आप रोजमर्रा की जिंदगी में किनसे मिलते हैं (काम के सिलसिले में या दोस्ती की वजह से), अपने आसपास रहने वालों लोगों के लिए आपका व्यवहार कैसा है और आप उनसे कैसे कनेक्ट हैं, ये है आपकी सामाजिक पहचान।
तो क्या है सबसे जरूरी? आपने ऊपर देखा कि आपकी पहचान के 5 आधार हैं। लेकिन अफसोस कि हममें से ज्यादातर लोग सिर्फ करियर पर ध्यान देना शुरू करते हैं क्योंकि हमें लगता है कि करियर जितना अच्छा होगा, बाकी की 4 पहचान के आधार (पर्सनल, फैमिली, रिलेशन, सोशल) भी उतने ही मजबूत होते जाएंगे। मगर ऐसा हमेशा नहीं होता है।
ये बात सच है कि हमारी उम्र के हिसाब से इन 5 में से कोई एक आइडेंटिटी हम पर सबसे ज्यादा हावी होती है। लेकिन याद रखिए एक अच्छी और खुशी से भरी जिंदगी जीने के लिए इन पांचों में बैलेंस होना बहुत जरूरी है। अगर इनमें से किसी भी एक पर आपने 100% फोकस किया और बाकी के 4 या 4 में से किसी एक को 0% किया तो आपके सुखी जीवन का बैलेंस बिगड़ता है। इसलिए आपको अपने जीवन में इन्हें बैलेंस करके रखना चाहिए.