बुरहानपुर में डस्ट एलर्जी से लोग हो रहे परेशान , डस्ट एलर्जी में क्या करें और क्या न करें ? आइए जानते हैं


बुरहानपुर शहर में अमृत योजना के तहत हो रहे विकास कार्यों से नागरिकों को अस्थायी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों की खुदाई के कारण जगह-जगह धूल उड़ रही है, जिससे लोग एलर्जी और श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि घर से बाहर निकलते ही धूल-धूसरित सड़कों से गुजरना उनकी दिनचर्या बन गई है। वाहन चालकों को भी धूल के कारण परेशानी होती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। 
डॉक्टरों के अनुसार, धूल के संपर्क में आने से कई लोग सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं।

इस बारे में डॉ. मनोज अग्रवाल जी ने बताया की बुरहानपुर में खासतौर पर सड़कों से उड़ती धूल, कॉटन के रेशे , घोड़ों की लीद (मल) ,कारखानों की गैस आदि डस्ट मिली होती है।
डस्ट एलर्जी क्या है ? उसके क्या कारण है ? क्या लक्षण है ? और उससे बचाव के क्या-क्या उपाय हैं ?

क्या है डस्ट एलर्जी ?

डस्ट एलर्जी एक प्रकार की एलर्जी है, जो धूल कणों में मौजूद सूक्ष्म कणों, माइट्स, पराग कणों, जानवरों के रोएं, फफूंद और अन्य एलर्जेन के संपर्क में आने से होती है। यह एलर्जी मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करती है और कई लोगों में गंभीर लक्षण पैदा कर सकती है।

डस्ट एलर्जी के कारण

1. धूल के कण (Dust Particles): हवा में मौजूद महीन धूल के कण एलर्जी का मुख्य कारण होते हैं।
2. डस्ट माइट्स (Dust Mites): 
ये सूक्ष्म कीट धूल में मौजूद होते हैं और इनके मल से एलर्जी हो सकती है।
3. पराग कण (Pollen): 
पेड़-पौधों से निकलने वाले पराग कण धूल में मिलकर एलर्जी बढ़ा सकते हैं।
4. जानवरों के रोएं (Pet Dander): पालतू जानवरों के झड़ते रोएं और त्वचा की परतें एलर्जी का कारण बन सकती हैं।
5. फफूंद (Mold Spores): 
नमी वाली जगहों में पनपने वाली फफूंद से भी एलर्जी हो सकती है।
6. वायु प्रदूषण (Air Pollution): धुआं, धूल और केमिकल युक्त प्रदूषित हवा भी एलर्जी को ट्रिगर कर सकती है।

डस्ट एलर्जी के लक्षण

1. नाक से जुड़ी समस्याएं: 
लगातार छींक आना, नाक बहना या बंद होना।
2. आंखों में जलन: 
आंखों में खुजली, लालपन और पानी आना।
3. सांस की तकलीफ: 
खांसी, घरघराहट (Wheezing) और दमा (Asthma) जैसी समस्या।
4. त्वचा की समस्या: 
खुजली, लाल चकत्ते और एक्जिमा।
5. सिरदर्द और थकान: 
अधिक धूल में रहने से सिरदर्द और सुस्ती महसूस हो सकती है।

डस्ट एलर्जी से बचाव के उपाय

1. घर में सफाई का विशेष ध्यान दें:

• नियमित रूप से झाड़ू-पोछा करें और वैक्यूम क्लीनर का उपयोग करें।
• घर की चादरें, पर्दे और तकिए के कवर समय-समय पर धोएं।
• सोफे और गद्दों को समय-समय पर धूप में रखें।

2. मास्क का उपयोग करें:

• बाहर निकलते समय मास्क पहनें, खासकर धूल भरी जगहों पर।
• सफाई करते समय भी मास्क लगाएं।

3. वातावरण में नमी बनाए रखें:

• कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें ताकि धूल कम उड़े।
• फफूंद से बचने के लिए घर को हवादार रखें।

4. पालतू जानवरों की सफाई करें:

• पालतू जानवरों को नियमित रूप से नहलाएं और उनके सोने की जगह साफ रखें।

5. सही आहार लें:

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लें।

6. डॉक्टर से परामर्श लें:

अगर लक्षण ज्यादा गंभीर हो जाएं तो एलर्जी स्पेशलिस्ट से संपर्क करें।

एंटीहिस्टामिन दवाओं या एलर्जी शॉट्स (Immunotherapy) की सलाह ले सकते हैं।

डस्ट एलर्जी एक आम समस्या है, लेकिन सही सावधानी और बचाव उपायों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। घर और आसपास की साफ-सफाई बनाए रखना, मास्क पहनना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सीय परामर्श लेना सबसे बेहतर उपाय हैं।






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