बुरहानपुर में अमृत योजना के तहत हो रहे विकास कार्यों से नागरिकों को अस्थायी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। सड़कों की खुदाई के कारण जगह-जगह धूल उड़ रही है, जिससे लोग एलर्जी और श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि घर से बाहर निकलते ही धूल-धूसरित सड़कों से गुजरना उनकी दिनचर्या बन गई है। वाहन चालकों को भी धूल के कारण परेशानी होती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। डॉ. मनोज अग्रवाल के अनुसार, धूल के संपर्क में आने से कई लोग सांस की तकलीफ, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं।
धूल खाते हुए ही लोग घर से बाहर जाते हैं और फिर घर में वापस आते हैं! इसलिए अन्य एलर्जी के मुकाबले धूल से होने वाली एलर्जी में लोग अधिक पीड़ित हो रहे हैं।
आज हम डॉ मनोज अग्रवाल जी से जानेंगे डस्ट एलर्जी के लक्षण, कारण ,बचाव के उपाय व इलाज के बारे में -
लक्षण क्या हैं ?
• बार-बार छींक आना
• नाक से पानी बहना
• आंखों में खुजली, लाल होना
• आंखों से लगातार पानी बहना
• नाक बंद होना
• नाक, मुंह, गले में खुजली हो सकती है
• सूखी खांसी होना
• आंखों के नीचे सूजन आ सकती है
• बच्चों में नाक को बार-बार ऊपर की ओर रगड़ने की प्रवृत्ति देखी जाती है
यदि एलर्जी के साथ-साथ किसी को अस्थमा या दमा भी हो, तो ऊपर बताए गए लक्षणों के साथ कुछ और गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
श्वास में दिक्कत होना
छाती में दबाव या दर्द महसूस होना
श्वास लेते समय छाती से सीटी जैसी या कभी-कभी घुड़घुड़ाहट की आवाज आना
बहुत बार श्वास लेना पड़ना
खांसी होने पर रात को सोने में परेशानी होना
डस्ट एलर्जी के कारण:
डस्ट माइट्स या सूक्ष्म धूल के कण या कीट जब हवा में तैरते हैं, तो वे नाक में जाकर जलन पैदा करते हैं, जिससे खुजली, छींक, खांसी हो सकती है।
घास या फूलों के पराग से भी एलर्जी हो सकती है।
आद्र वातावरण में डस्ट माइट्स अधिक होते हैं, जिससे घरों में एलर्जी की समस्या हो सकती है।
डस्ट एलर्जी से बचाव के उपाय:
• घर से बाहर जाते वक्त हमेशा मास्क पहनें।
• घर के फर्नीचर पर धूल नियमित रूप से साफ करें।
• हर दिन बिस्तर को अच्छे से झाड़ें।
• घर में सफाई करते वक्त नाक और मुंह को अच्छी तरह से ढक लें।
• रोज़ इस्तेमाल किए जाने वाले कपड़े, चादर, तकिए आदि को कभी-कभी धूप में रखें।
• सप्ताह में कम से कम एक बार बिस्तर की चादर और तकिए का कवर बदलें।
• बेडरूम में किताबों का रैक, पत्रिकाएं और अखबार न रखें, क्योंकि इन पर आसानी से धूल जमा होती है।
• अगर डस्ट एलर्जी है तो घर में कालीन नहीं रखना चाहिए।
• घर में पंख या फर वाले जानवर न पालें, क्योंकि इनमें एलर्जी पैदा करने वाले तत्व होते हैं।
• सुनिश्चित करें कि कमरे में पर्याप्त रोशनी और हवा की आवाजाही हो।
इलाज के बारे में जानें:
• एलर्जी के कारण का सही पता लगाने के लिए कुछ परीक्षण जैसे स्किन एलर्जी टेस्ट, ब्लड टेस्ट आदि की आवश्यकता हो सकती है।
• खुजली, लगातार छींक, आंखों का लाल होना या आंखों से पानी बहना, इन समस्याओं के लिए एंटी-हिस्टामिन दवाइयां राहत दे सकती हैं।
• आराम से बैठें, आंखें बंद करके थोड़ा आराम करें।
• स्टेरॉयड वाले नाक स्प्रे का उपयोग नाक के अंदर की सूजन को कम कर सकता है।
• नाक बंद हो तो सलाइन सॉल्यूशन से नाक साफ करें।
• एलर्जी होने पर जब तक ठीक न हो, एलर्जी कारक खाद्य पदार्थ जैसे मांस, इलिश मछली, झींगा, शाकाहारी भोजन आदि न खाएं, क्योंकि ये समस्या को बढ़ा सकते हैं।
• अचानक त्वचा पर लाल चकत्ते या खुजली होने पर ठंडे पानी से सिकाई करें या ठंडे पानी से स्नान करें।
एलर्जी की समस्या कितनी कष्टकारी और परेशान करने वाली हो सकती है, यह केवल पीड़ित ही समझ सकते हैं। एलर्जी का इलाज करके पूरी तरह से छुटकारा पाना संभव नहीं है, लेकिन यदि सही उपाय और चिकित्सक की सलाह के अनुसार इलाज किया जाए, तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए डस्ट एलर्जी से बचने के लिए बाहर जाते वक्त मास्क पहनें, सफाई रखें और स्वस्थ रहें।
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