बुरहानपुर से लगभग 22 किलोमीटर दूर असीरगढ़ किले के नीचे सड़क के पश्चिम में थोड़े फासले पर धूलकोट रोड के किनारे बना यह शिव मंदिर दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का एक उत्कृष्ट नमूना है ।
यह मंदिर आज भी अच्छी स्थिति में विद्यमान है इस मंदिर को मराठा शासक द्वारा दक्षिण शैली में काले पत्थरों से बनवाया गया था ।
शिव मंदिर अति प्राचीन है जो अपनी विशेष बनावट के कारण आकर्षक दिखाई देता है ।
मंदिर परिसर में एक दीप स्तंभ बना हुआ है जिसमें त्योहारों पर सैकड़ों दीप प्रज्वलित किए जाते हैं ।
इस मंदिर के दाहिने और प्राचीन बावड़ी निर्मित है जिसमें नीचे तक जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है
कहा जाता है कि पुराने समय में जो लोग यहां रहते थे वह इस बावड़ी में स्नान करने के बाद शिव भगवान के दर्शन करने मंदिर में जाते थे किंतु उचित देखभाल के अभाव में यह बावड़ी अनुपयोगी हो चुकी है ।
मंदिर के मंडप में आपको एक घंटी देखने को मिलती है यह घंटी लंदन की है जिस पर इंग्लैंड के सात वर्ष 1885 अंकित है ।
कहा जाता है कि मंदिर पर 200 किलो वजनी विशाल घंटा लगा हुआ था जिसे बजाने से ओम की ध्वनि सुनाई देती थी इसी विशेषता की वजह से अंग्रेज इसे निकाल कर अपने साथ ले गए जो आज भी लंदन के म्यूजियम में रखी हुई है ।
अंग्रेजों द्वारा इस घंटी के स्थान पर एक दूसरा बड़ा घंटा मंदिर के गर्भ गृह में लगाया गया है ।
इस मंदिर को जमीन की सतह से नीचे से बनाया गया है और मंदिर में जाने के लिए सीढ़ियां हैं ।
मंदिर में जब आप जाते हैं तो आपको भगवान शिव के दर्शन करने को मिलते हैं ।
इस प्राचीन शिव मंदिर में काले पत्थर से बना हुआ शिवलिंग विराजित है इस मंदिर में आपको नंदी भगवान के भी दर्शन होते हैं जो कि पत्थर से बने हुए हैं ।
मंदिर के गर्भ गृह में एक झरोखा बनाया गया है जिसमें भगवान शिव पर सूर्य की किरणें सीधे पड़ती हैं।
इस मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग के सामने माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा भी स्थापित है ।
यहां भगवान गणेश की दुर्लभ प्रतिमा लगी हुई है जिसकी सूंड दाहिनी तरफ है ।
यह प्रतिमा सिद्धिविनायक होने के साथ-साथ गणेश जी के रौद्र रूप को भी दर्शाती है ।
पुजारियों के अनुसार दाहिने सूंड वाले गणेश सर्व सिद्धि प्रदान करते हैं साथ ही ऐसी प्रतिमाओं को तंत्र क्रियाओं में भी उपयोगी माना जाता है ।
यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है ।
इस प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन करने त्योहारों व सावन में हजारों भक्त पहुंचते हैं ।
शिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजन अर्चन किया जाता है और मंदिर परिसर में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजे जाते हैं ।
मंदिर के आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य आपको बहुत ही लुभाता है
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