यहाँ दर्शन करके मन में अद्भुत शांति और प्रसन्नता का अनुभव हुआ । यदि यूँ कहे की ये जैन मंदिर आस पास के २०० किमी के क्षेत्र में सबसे प्राचीन, भारी, अद्भुत और कलात्मक जैन मंदिर है तो गलत नहीं होगा । इस मंदिर जी में आस पास के कई क्षेत्रो जैसे की - असीरगढ़, मुक्ताईनगर, शाहपुर, रेहता और आसपास के कई ग्रामो से प्राप्त प्राचीन जैन प्रतिमाएं यहाँ विराजमान की गयी है तभी ये मंदिर बहुत ही विशेष और धरोहर समृद्ध बन गया है । यहाँ की हरेक प्रतिमा जी कुछ न कुछ विशेषता, प्राचीनता, कलात्मकता या आकर्षण लिए हुए है, कि सभी का अलग से इस लेख में वर्णन करना संभव नहीं है, ये आपको वहां जाने पर, दर्शन करने पर स्वयं ही अनुभव हो जाएगा । किन्तु एक अद्भुत और प्राचीन प्रतिमा जी के बारे में यहाँ उल्लेख करूँगा - एक प्राचीन काले पाषाण/ग्रेनाइट से बनी हुई शंख पर खड़े नेमिनाथ तीर्थंकर की लगभग सवा दो फ़ीट की खड्गासन प्रतिमा जी प्राचीन तो है ही, साथ ही अद्भुत भी है और कही और देखने में नहीं आती है । इसके अलावा मंदिर जी में मध्यकालीन स्थापत्य और चित्रकला शैली का प्रभाव भी दिखाई पड़ता है। मंदिर की आतंरिक दीवारों पर स्थित शानदार प्राचीन तेल चित्र, कंगूरे, गोखडे, नक्काशी और मीनाकारी हमारा मन मोह लेती है ।
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