मतुआ समुदाय कौन हैं ? नागरिकता संशोधन कानून से उनका क्या संबंध है ?

मतुआ समुदाय
* नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) मुस्लिमों के प्रति भेदभाव के रूप में प्रचारित कर विरोध कर रही है, लेकिन ममता बनर्जी की बेचैनी की बड़ी वजह कुछ और भी है।
* दरअसल, भाजपा ने सीएए लागू कर उस मतुआ समुदाय की वर्षों पुरानी मांग पूरी कर दी है, जो बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
* लगभग 25 लोकसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाने वाली एक करोड़ की आबादी वाले वोटबैंक पर भाजपा के बढ़ते प्रभाव से सतर्क टीएमसी डैमेज कंट्रोल करते हुए 'ममता की डोर' से बांधने का प्रयास कर रही थी। लेकिन सीएए लागू कर भाजपा ने ममता बनर्जी की नजर में बैठे इस बड़े वोटबैंक पर जैसे 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर डाली है।
* बता दें कि भारत के विभाजन के बाद पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से बड़ी संख्या में मतुआ बंगाल आ गए थे
* ये ऐसे शरणार्थी हैं, जिन्हें आज तक भारतीय नागरिकता नहीं मिल पाई है
* केंद्र सरकार ने देश भर में सीएए लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। इस कानून के लागू होने से बांग्लादेश से सालों पहले आकर बसे हिंदू शरणार्थी को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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