* दैत्यगुरु शुक्राचार्य का एक शिष्य था जिसका नाम मोहासुर था
* अपने गुरु के आदेश से मोहासुर ने भगवान् सूर्य की कठोर तपस्या की भगवान् सूर्य प्रसन्न हो गए तथा मोहासुर को सर्वत्र विजय का वरदान दे दिया
* वरदान पाकर मोहासुर अपने गुरु के पास गया गुरु ने मोहासुर को दैत्यराज घोषित कर दिया और उसका राज्याभिषेक कर दिया
* मोहसुर ने अपने बल, पराक्रम और वरदान के बल पर तीनो लोकों को जीत लिया
* समस्त देवी, देवता, ऋषि, मुनि, सब मोहासुर के भय से छुप गये वर्णाश्रम -धर्म, सत्कर्म, यज्ञ, तप आदि सब नष्ट हो गये
* मोहासुर तीनो लोको पर राज करने लगा परन्तु दुखी और हारे हुए देवी, देवता, ऋषि, मुनि, सब भगवान् सूर्य के पास गए तथा इस भयानक विपत्ति से निकलने का उपाय पूंछा
* भगवान् सूर्य ने सभी देवी देवताओं को श्री गणेश का एकाक्षरी मंत्र दिया और श्री गणेश को प्रसन्न करने की प्रेरणा दी
* समस्त देवी देवता श्री गणेश को पूर्ण भक्ति भाव से प्रसन्न करने के लिए उपासना करने लगे
* उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर भगवान महोदर प्रकट हुए
* देवताओं और मुनियों ने अत्यंत आर्त होकर महोदर की स्तुति की
* भगवान महोदर ने कहा की मैं मोहासुर का वध करूँगा आप लोग निश्चिंत हो जाये ऐसा कह कर मूषक पर सवार भगवान महोदर मोहासुर से युद्ध करने के लिए चल दिये
* यह समाचार देवर्षि नारद ने मोहासुर को दिया तथा अनंत पराक्रमी समर्थ महोदर का स्वरूप भी उसे समझाया
* दैत्यगुरु शुक्राचर्या ने भी उसे भगवान महोदरी की शरण लेने का शुभ परामर्श दिया
* उसी समय भगवान महोदर का दूत बनकर भगवान विष्णु मोहासुर के पास गये उन्होंने मोहसुर से कहा -’तुम्हें अनन्त शक्ति - सम्पत्र भगवान महोदर से मित्रता कर लेनी चाहिये यदि तुम महोदर की शरण -ग्रहण कर देवताओं, मुनियों तथा ब्राह्मणों को धर्म पूर्वक जीवन बिताने में व्यवधान न पैदा करने का वचन दो तो दयामय प्रभु तुम्हें क्षमा कर देंगे यदि तुम ऐसा नहीं करते हो तो रणभूमि में तुम्हारी रक्षा असम्भव है
* मोहासुर का अहंकार नष्ट हो गया उसने भगवान विष्णु से निवेदन किया आप परम प्रभो भगवान महोदर को मेरे नगर में लाकर उनके दुर्लभ-दर्शन का अवसर प्रदान करें
* भगवान महोदर ने नगर में पदार्पण किया मोहासुर ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किय
* दैत्य युवतियों ने पुष्प वर्षा की । मोहासुर ने भगवान महोदर की श्रद्धा -भक्तिपूर्वक पूजा की
* कंठ से स्तुति करते हुए उसने कहा की प्रभो ! अज्ञान -वश मेरे द्वारा जो अपराध हुआ हो उसके लिये मुझे क्षमा करें मैं आपके प्रत्येक आदेश का -पालन करने का वचन देता हूँ अब मैं देवताओं और मुनियों के निकट भूलकर भी नहीं जाऊंगा । उनके किसी भी धर्माचरण में विघ्न नहीं पैदा करूँगा
* सहज कृपालु भगवान महोदर मोहासुर की दीनतापर प्रसन हो गये उसे अपनी भक्ति प्रदान कर दी
* मोहासुर के शान्त होने से देवता, ऋषि, ब्राह्मण तथा धर्म परायण स्त्री-पुरष सभी सुखी हो गये
* देवता और मुनि महाप्रभु महोदर की स्तुति एवं जय जय कार करने लगे
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धर्म सँसार