हरियाली तीज का क्या है धार्मिक महत्व ? क्या है हरियाली तीज की कथा ?

माना जाता है कि इसी दिन माता पार्वती का तप फलित हुआ था और शिवजी ने उन्हें पत्नी के तौर पर स्वीकार किया था. तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर कहा था, कि आज तुम्हारा तप सफल हुआ है. अब से सावन मास की तृतीया तिथि के दिन जो स्त्री निष्ठापूर्वक व्रत व पूजन करेगी, मैं उसे मनवांछित फल प्रदान करूंगा.  माना जाता है कि इस दिन कुंवारी कन्याएं पूरी श्रद्धा से शिव जी और मां पार्वती का पूजन करें, तो उन्हें सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है. 

हरियाली तीज की कथा

हरियाली तीज की कथा सुनाते हुए भगवान शिव माता पार्वती से कहते हैं कि हे पार्वती ! तुमने मुझे पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया. अन्न और जल का भी त्याग कर दिया और सर्दी, गर्मी, बरसात जैसे मौसम की भी कोई फिक्र नहीं की. तब जाकर तुम्हें मैं प्राप्त हुआ हूं. अब से पूजा के दौरान तुम्हारे इसी कठोर तप की कथा को ही पढ़ा जाएगा और सुना जाएगा. इससे अन्य महिलाओं को भी तुम्हारे तप के समान पुण्य की प्राप्ति होगी और उनकी कामना की पूर्ति होगी.

महादेव कथा सुनाते हुए कहते हैं कि हे पार्वती ! एक बार नारद मुनि तुम्हारे घर पधारे और उन्होंने तुम्हारे पिता से कहा कि मैं विष्णुजी के भेजने पर यहां आया हूं. भगवान विष्णु स्वयं आपकी तेजस्वी कन्या पार्वती से विवाह करना चाहते हैं. नारद मुनि की बात सुनकर पर्वतराज बेहद प्रसन्न हुए और उन्होंने शादी के इस प्रस्ताव को तुरंत स्वीकार कर लिया. लेकिन जब तुम्हारे पिता ने ये बात तुम्हें बताई तो तुम बहुत दुखी हुईं क्योंकि तुम तो पहले ही मन से मुझे अपना पति मान चुकी थीं.

तब तुमने अपने मन की पीड़ा अपनी सहेली से कही. इसके बाद तुम्हारी सहेली ने तुम्हें जंगल में कठोर तप करने का सुझाव दिया. सखी की बात मानकर तुम मुझे पति के रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में चली गईं और वहां एक गुफा के अंदर रेत की शिवलिंग बनाकर तप करने लगीं. तुम्हारे लुप्त होने से तुम्हारे पिता बहुत परेशान थे. वे हर जगह तुम्हें तलाश रहे थे. उन्हें इस बात की चिंता थी कि कही तुम न मिलीं और विष्णुजी बारात लेकर आए तो क्या होगा?

शिवजी माता पार्वती से आगे कहते हैं कि तुम्हारे पिता पर्वतराज ने तुम्हारी खोज में धरती और पाताल एक कर दिया, लेकिन तुम्हें ढूंढ नहीं पाए. तुम गुफा में सच्चे मन से तप करने में लगी रहीं. सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर प्रसन्न होकर मैंने तुम्हें दर्शन दिए और तुम्हारी मनोकामना को पूरा करने का वचन देते हुए तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया. इसके बाद तुम्हारे पिता भी ढूंढते हुए गुफा तक पहुंच गए. तुमने अपने पिता को सारी बात बताई और कहा कि मैं आपके साथ तभी चलूंगी, जब आप मेरा विवाह शिव के साथ करवाएंगे.

तुम्हारी हठ के आगे पिता की एक न चली और उन्होंने ये विवाह करवाने के लिए हामी भर दी. शिव जी आगे कहते हैं कि श्रावण तीज के दिन तुम्हारी इच्छा पूरी हुई और तुम्हारे कठोर तप की वजह से ही हमारा विवाह संभव हो सका. इसलिए श्रावणी तीज का दिन महिलाओं की कामना पूर्ति वाला दिन बन गया. शिव जी ने कहा कि जो भी महिला श्रावणी तीज पर व्रत रखेगी, विधि विधान से पूजा करेगी, तुम्हारी इस कथा का पाठ सुनेगी या पढ़ेगी, उसके वैवाहिक जीवन के सारे संकट दूर होंगे और उसकी मनोकामना मैं जरूर पूरी करूंगा.

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