विश्व अस्थमा दिवस
* हर साल मई माह के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस के रूप में मनाया जाता है.
* लोगों तक अस्थमा से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाने और उन्हें इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के लिए विश्वभर में इस दिन को मनाया जाता है.
* बता दें अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो कि फेफड़ों पर अटैक करके सांस को प्रभावित करती है.
* ऐसे में अस्थमा के मरीजों की सहायता करना भी इस दिन का उद्देश्य है.
* अस्थमा सांस की नली एवं फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है.
* इसमें कई बार सही वक्त पर मरीज को इलाज ना मिले, तो उसकी जान भी जा सकती है.
* यह रोग बच्चों से लेकर वयस्कों को कभी भी हो सकता है.
* प्रत्येक वर्ष ‘विश्व अस्थमा दिवस’ को एक खास थीम के तहत मनाते हुए लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है.
* इस साल (2022) इस दिवस की थीम ‘क्लोजिंग गैप्स इन अस्थमा केयर’ ( Closing Gaps in Asthma Care) रखी गई है.
* अस्थमा एक लंबे वक्त तक चलने वाली सूजन संबंधी बीमारी है, जो फेफड़ों के वायुमार्ग को प्रभावित करती है.
* विश्व अस्थमा दिवस की शुरुआत साल 1993 में ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से की गई थी.
* इस दिन का आयोजन साल 1998 में 35 से अधिक देशों में किया गया था.
* विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस दिन को महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य दिवसों में से एक माना जाता है.
* विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, यह अनुमान लगाया गया था कि वैश्विक स्तर पर 339 मिलियन से अधिक लोगों को अस्थमा था और साल 2016 में वैश्विक स्तर पर अस्थमा के कारण 417,918 मौतें हुई थीं.
* अस्थमा के लक्षणों में मुख्य रूप से सांस लेने में दिक्कत होने लगती है क्योंकि श्वास नलियों में सूजन आने के वजह से श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है.
* अस्थमा एक बहुत घातक बीमारी है इसलिए इसके शुरूआती लक्षण सामने आते ही सही इलाज जरूर करवाएं, क्योंकि इसके इलाज के अभाव से यह जानलेवा साबित हो सकता है.
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