भारतीय सिनेमा में उनके योगदान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऑस्कर कमेटी ने लाइफटाइम अचीवमेंट का ऑस्कर पुरस्कार कोलकाता में उनके घर आकर दिया था।
लाइफटाइम अचीवमेंट ऑस्कर पाने वाले सत्यजीत पहले और एकमात्र भारतीय हैं।
1950 में कंपनी के काम से वह लंदन गए और वहां उन्हें कई फिल्में देखने को मिली।
इनमें एक अंग्रेजी फिल्म ‘बाइसिकल थीव्स’ भी थी।
इसकी कहानी से रे इस कदर प्रभावित हुए कि भारत लौटते ही एक नौसिखिया टीम लेकर 1952 में अपनी पहली फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ की शूटिंग शुरू कर दी।
उस समय एक नए फिल्मकार पर कोई पैसा लगाने के लिए कोई तैयार नहीं था।
ऐसे में इस फिल्म को बनाने में रे ने अपनी पूरी पूंजी लगा दी। उन्होंने बीवी के जेवर तक गिरवी रख दिए, लेकिन इन पैसों से वह शूटिंग ज्यादा दिन नहीं खींच सके।
सत्यजीत रे पर दबाव बना कि फिल्म में कुछ बदलाव करें, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया।
आखिर में पश्चिम बंगाल सरकार ने उनकी मदद की और १९५५ में पाथेर पांचाली परदे पर आई।
इस फिल्म ने कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिसमें कान फिल्म फेस्टिवल का ‘बेस्ट ह्यूमन डॉक्यूमेंट्री’ शामिल है।
Tags
व्यक्ति विशेष