मोहन माकीजनी यानी मैक मोहन का जन्म 24 अप्रैल 1938 में ब्रिटिश भारत के कराची में हुआ था। उनके पिता भारत में ब्रिटिश आर्मी कर्नल थे। वो मशहूर अदाकारा रवीना टंडन के मामा भी थे। 1940 में मैक के पिता का ट्रांसफर हुआ और वो लखनऊ आ गए। मैक ने लखनऊ में पढ़ाई की और वहां उनकी दोस्ती सुनील दत्त से हो गई। कॉलेज से ही मैक ने थिएटर शुरु किया और पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट से एक्टिंग भी सीखी।
हिंदी सिनेमा की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म 'शोले' में मैक मोहन ने सांभा का किरदार निभाया है। और आप यह भी जानते होंगे कि लगभग तीन घंटे लंबी फिल्म में सांभा ने सिर्फ एक ही संवाद बोला है। और वह है 'पूरे पचास हजार'। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस छोटे से संवाद के लिए मैक मोहन को मुंबई से बेंगलुरु 27 बार यात्रा करनी पड़ी थी। शुरुआत में फिल्म में उनका किरदार थोड़ा लंबा था। लेकिन, फिल्म को संपादित होने के बाद सिर्फ तीन शब्द ही बचे।
मैक मोहन ने फिल्म 'शोले' को संपादित होने के बाद जब देखा तो उन्हें बहुत निराशा हाथ लगी। एक इंटरव्यू के दौरान मैक मोहन ने बताया, 'जब मैंने फिल्म को देखा तो मैं रोने लग गया था। मैं सीधे फिल्म के निर्देशक रमेश सिप्पी के पास गया और उनसे बोला कि रमेश जी आपने मेरा इतना थोड़ा सा किरदार भी क्यों रखा? आप चाहते तो इसे भी हटा ही देते। इस सवाल पर रमेश जी ने मुझसे कहा कि अगर यह फिल्म हिट हुई तो दुनिया मुझे सांभा के नाम से जानेगी। और हुआ भी ऐसा ही। पता नहीं वह कौन सी घड़ी थी जिस घड़ी में रमेश जी ने यह शब्द बोले।'
एक बार जब मैक मोहन अमेरिका के शहर न्यूयॉर्क घूमने के लिए गए थे तो उन्हें वहां एक अफसर ने सांभा कहकर बुलाया। उसने 'शोले' फिल्म देखी जरूर थी लेकिन सांभा का असली नाम उसे नहीं पता था। यह उस बड़ी सी फिल्म में छोटे से किरदार का ही कमाल था जिससे लोग मैक मोहन को सांभा के नाम से ही जानने लगे थे।
मैक मोहन ने 30 जून 1986 में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक मिनी से शादी की थी। इस शादी से उन्हें तीन बच्चे विनती, विक्रांत और मंजरी हुए। मंजरी पेशे से फिल्म निर्माता और निर्देशक हैं। उन्होंने थिएटर करने के बाद 'द लास्ट मार्बल' जैसी शॉर्ट फिल्म लिखी और खुद ही निर्देशित भी की। उनकी दूसरी बेटी विनती अभिनेत्री हैं वहीं उनका इकलौता बेटा विक्रांत भी एक अभिनेता है।
वर्ष 2010 में अजय देवगन, परेश रावल, कोंकणा सेन शर्मा, सतीश कौशिक, संजय मिश्रा जैसे सितारों से सजी फिल्म 'अतिथि तुम कब जाओगे' आई। इस फिल्म में मैक मोहन को भी एक किरदार के लिए लिया गया था। लेकिन, फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही मैक मोहन बीमार पड़ गए और उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। यहां से वह ठीक नहीं हुए और 10 मई 2010 में उन्होंने इसी अस्पताल में अपनी अंतिम सांसें लीं।
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