बुरहानपुर-महिला एवं बाल विकास विभाग बुरहानपुर द्वारा बाल संरक्षण एवं किशोर सशक्तिकरण संवाद श्रृखला तथा लाङो अभियान के अंतर्गत बाल विवाह रोकथाम के लिए वृहद स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है। अक्षय तृतीया को दृष्टिगत रखते हुए शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो मंे अलग-अलग माध्यमांे से जनसमुदाय और विशेषकर किशोरो एवं युवाओ को जोङकर बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरूकता गतिविधिया हो रही है।
इसी तारतम्य में श्री गुरूगोविंद सिह ङेन्टल कालेज में युवाओ से बाल विवाह पर संवाद आयोजित किया गया।
उद्घाटन सत्र में सभी का स्वागत करते हुए कॉलेज के उपप्राचार्य ङाँ. मनीष सरोदे ने सभी उपस्थित अतिथियो का स्वागत किया तथा उन्होंने कहा कि आज का यह संवाद कार्यक्रम आरंभ है। बाल संरक्षण के मुद्दो पर काम करने के लिए, भविष्य मे एक कैलेण्ङर के अनुसार बाल संरक्षण के मुद्दो और अन्य सामाजिक मुद्दों पर समझ बढाने के लिए इस प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किये जायेगे। जिससे युवाओ में बाल संरक्षण संबंधी मुद्दो पर समझ विकसित होगी और वह भविष्य मे इस मुद्दे पर संवेदनशीलता के साथ काम कर पायेंगे।
कार्यक्रम में सुमन कुमार पिल्लई, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग बुरहानपुर ने बताया कि महिला एवं बाल विकास विकास विभाग द्वारा कलेक्टर श्री प्रवीण सिंह के मार्गदर्शन मंे बाल विवाह को रोकने के विशेष प्रयास किए जा रहे है। जिला, विकासखंड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी समितियो का गठन किया गया है, जो अक्षय तृतीया तथा उसके बाद होने वाले विवाहो पर सतर्कता के साथ मानीटरिंग करेंगी और रिपोर्ट ङीपीओ के माध्यम से कलेक्टर बुरहानपुर को सौपेंगीे।
परियोजना स्तर पर परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षण एवं आगनवाङी कार्यकर्ता सघनता से अपने-अपने क्षेत्रो का भ्रमण कर विवाह की जानकारी एकत्र कर रहे है साथ ही सेवा प्रदाताओ से संपर्क स्थापित करके उनसे बाल विवाह मंे किसी भी प्रकार के सहयोग ना देने की समझाईश दे रहे है तथा उसकी सूचना 1098 चाइल्डलाइन, नजदीकी आँगनवाङी केन्द्र तथा नजदीकी पुलिस थाने में देने हेतु आग्रह किया जा रहा है। जिला प्रशासन पूरी तन्मयता के साथ बाल विवाह रोकथाम के प्रति गंभीरता से काम कर रहा है। यदि जनसमुदाय का सकारात्मक सहयोग मिले तो बाल विवाह जैसे अपराध को रोका जा सकता है।
श्री राजेन्द्र सलूजा, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति ने बाल कल्याण समिति की भूमिका बताते हुए वर्तमान मे बाल विवाह रोकथाम पर चर्चा की उन्होंनेे बताया कि किस प्रकार से हम जनसमुदाय को शामिल करके किसी भी अपराध या बुराई को खत्म कर सकते है इसके लिए समन्वित प्रयास जरूरी है इसके लिए युवाओ को आगे आना होगा और अपने काम के साथ-साथ सामाजिक दायित्व का निर्वाहन करना पङेगा। इसलिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम युवाओ के बीच मे आयोजित किये जा रहे है।
श्रीमती विजया चौहान, सदस्य बाल कल्याण समिति ने बताया कि हमे बाल विवाह को समझना पङेगा हमे यह समझना पङेगा कि कैसे बाल विवाह बच्चो का जीवन बर्बाद कर देता है। उससे उसका बचपना, उसका सपना और कभी-कभी तो जीने की इच्छा भी खतम कर देता है। हम सब को मिलकर बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता के साथ काम करना होगा। उन्होंने बच्चो के मुददो पर जन समुदाय को समझ बनाने की जरूरत पर बल दिया तथा युवा इसमे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है और उनको स्वैच्छा से इसके लिए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम मे श्री सुनील सेन, जिला समन्वयक, ममता (यूनिसेफ समर्थित) ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के बारे में उपस्थित प्रतिभागियांे से संवाद किया। उन्होंने बताया कि कैसे बाल विवाह अधिनियम के कानूनी प्रावधानो अंतर्गत बाल विवाह मे शामिल सभी मेहमान, घर वाले, रिश्तेदार, फूल भंडार, टेन्ट, लाइट एवं ङेकोरेशन, हलवाई, शादी हाल/गार्ङन, बैङ बाजा, पंङित, मौलवी, पादरी, साज सज्जा, कार्ङ छापने वाले आदि वो सभी जो प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से बाल विवाह कार्य मंे सहयोगी बनते है, उन्हे बढावा देते है, करवाते है उनके लिए दो साल की सजा या एक लाख का जुर्माना या दोनो से दंडित किया जा सकता है।
इसलिए किसी भी शादी मंे जायंे तो यह सुनिश्चित करंे की कही वह बाल विवाह तो नहीं है जहाँ लङकी की उम्र 18 वर्ष से कम तथा लङके की 21 वर्ष से कम हो यदि ऐसा कही दिखाई देता है तो तुरंत 1098 चाइल्ड लाइन को जानकारी प्रदान कर बाल विवाह रोकने मंे सहयोगी बने और अपराध मुक्त, स्वस्थ समाज की बनने मे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। कार्यक्रम के अंत में ङाँ. अभिषेक चौरसिया ने सभी अतिथियो, मीङिया, कॉलेज स्टाफ और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
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