बुरहानपुर - जिला अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम पर एक महा विद्यालयीन कार्यशाला समपन्न हुई ,जिसमे कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ इकरामुल हक , मनकक्ष विभाग प्रभारी स्टाफ नर्स सीमा डेविड , अंकिता हरिन्द्रवार , सेवा सदन कॉलेज के प्रोफेसर डा. राजेश काले , प्रोफेसर अल्ताफ अंसारी , प्रोफेसर संजय महाजन एवँ कालेज के बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित हुए।
जिन्हें जिला अस्पताल के प्रत्येक विभाग की विजिट करवाकर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की जानकारी दी गई।
नोडल अधिकारी डॉ हक ने बच्चों को बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन, मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए कहता है कि यह "सलामती की एक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास रहता है, वह जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता है और अपने समाज के प्रति योगदान करने में सक्षम होता है।इसके लिए मानसिक रोगी, पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। इसके अलावा, शारीरिक गतिविधियां करें। जैसे व्यायाम करें, पैदल चलें और स्वीमिंग करें। वहीं, ड्रग्स और शराब का सेवन न करें।
सामान्य मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मूल्यांकन, परामर्श, परामर्श, मामला प्रबंधन और रेफरल शामिल हैं। समूह परामर्श उपलब्ध हो सकता है और विशेष सेवाओं की पेशकश की जा सकता है। सामुदायिक विकास और रोकथाम कार्यक्रमों भी सार्वजनिक या अन्य पेशेवरों के सदस्यों के लिए उपलब्ध हैं।आइए हम आपको बताते हैं दिमाग को फिट रखने के तरीके...
नया सीखते रहें दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए कोशिश करनी चाहिए कि कुछ नया सीखते रहना चाहिए। ... सीमा डेविड स्टाफ सिस्टर द्वारा भी सम्बोधित करते हुए जानकारी दी गई कि
शरीर का ध्यान रखें ...
सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताएं ...
दूसरों की सहायता करें ...
तनाव को दूर रखें ...
शांत रहें ...
लक्ष्य तय करें ...
जरूरत पड़ने पर मदद लें
उक्त रोग की दवा एवँ काउंसिल अति अनिवार्य है जो जिला अस्पताल में पूर्णता निशुल्क उपलब्ध होती है।