रहेमान....! एक आला दर्जे का कलाकार.. !
लाहोर पाकिस्तान मे 23 जुन 1921 के रोज पेदा हूवे और 5 नवंबर 1984 के रोज बंबई में केंन्सर से गुजर गये....उसके दरमियान बोलीवुड मे उनका प्रदान काबिले तारिफ रहा..!
आखरी दिनों मे जब वह केंन्सर से पिडित थे तो उनके अपनों ने उनका साथ छोड़ दिया था.. सिर्फ अभिनेत्री नंदा जीसने रहेमान के साथ फिल्म छोटी बहेन में काम किया था उसने रहेमान को आथिर्क मदद की थी..!
देव आनंद और सुरैया की जोड़ी जब धूम मचा रही थी तब रहेमान ने सुरैया के साथ बडी़ बहेन और प्यार की जीत मे हिरो नी याद गार भुमिका निभाई थी..!
सुरैया मीना कुमारी नरगिस,गीता बाली, कामिनी कौशल जैसी हिरोइनो के साथ भी रहेमान ने हिरो की याद गार भुमिका निभाइ हे..!
अशोक कुमार ,दिलीप कुमार ,राज कपुर और देव आनंद जेसे बडे़ बडे़ कलाकारों के समय में भी रहेमान ने अपने अदभुत और मोहक व्यक्तितव से ओडीयंस को प़भावीत किया था. ।
Dialogue delivery में अपनी अनोखी style से रहेमान मशहूर थे ।
1946 में देव आनंद के साथ ही फिल्म हम एक हे मे रहेमान पहेली बार फिल्म परदे पर आये.. और आखिरी बार फिल्म आहिस्ता आहिस्ता में कोलेज के प्रिन्सीपल के रोल मे दिखाई दिये थे।
रहेमान ने फिल्मों में हिरो के रोल करके जितनी लोक प्रियता प्राप्त की उस से कइ जयादा लोक प्रियता रहेमान ने गुरु दत्त की फिल्मों में याद गार भुमिकाए कर के प्राप्त की। फिल्म प्यासा साहेब बीवी और गुलाम चौदहवीं का चांद जेसी फिल्मों में रहेमान का अभिनय और व्यक्तित्व ला जवाब था। इन फिल्मों में रहेमान ने प़काशक नवाब और जमीनदार की भुमिकाए बखुबी निभाइ थी. ।
फिल्म पालकी मेरे महबूब नुर जहाँ ताज महेल जैसी ऐतिहासिक और मुस्लिम बेक ग़ाउंड वाली फिल्मों में भी रहेमान ने याद गार अभीनय किया.. फिल्म फिर सुबह होगी मे राज कपुर के दोस्त और छोटी बहेन मे राह से भटके भाई की भुमिका मे रहेमान ने कमाल कर दी थी। गुलज़ार की फिल्म आंधी मे भी वोह थे.. रहेमान को रौबदार भुमिका बहुत जचती थी उसकी परसनालीटी ही रौबदार थी।
रहेमान 1947 मे सुरैया के साथ बडी बहेन और प्यार की जीत मे हिरो थे ..सन1958 मे ट़ोली डा़ईवर जेसी सी ग़ेड की फिल्म में भी सुरैया के हिरो रहे..! 1967 मे शशिकला के साथ फिल्म सूनहरे दिन में हिरो थे! चित्रा और अमिता के साथ भी परवीन और आंगन जैसी फिल्मों में रहेमान हिरो थे।
रहेमान चेस खेलने के बड़े शौकीन थे तो संजीव कुमार की तरह पैसों के मामले में बडे कंजुस थे! उनके दोस्त रहेमान से खर्च करवाने के लिए कइ नूशके आजमाते थे!
रहेमान हमारे गुजरात के अहमदाबाद के जमाई थे..! सुना हे रहेमान सिर्फ दो या तीन कस मे पुरी सिगरेट खत्म कर देते थे! ये भी सुना हे की उनकी कोई संतान नहीं हे..!
रहेमान ने हिरो के तौर पर फिलमें की जीसमे ...
मगरूर निगार सुलतान के साथ। परदेश मधुबाला के साथ। पयार की मंजिल मुनव्वर सुलतान के साथ। राजा रानी शान शादी की रात एक नज़र नलीनी जयवंत के साथ। फरयादी निम्मी के साथ। गौहर बीना रोय के साथ उल्लेखनीय हे।।
केरेक्टर ऐकटर के तौर पर वक्त के चिनोय शेठ को कौन भुल शकता हे! धर्मेन्द्र नूतन के साथ दुल्हन एक रात की और दील ने फिर याद कीया । येह रास्ते हे पयार के। गंगा की लहर। कैसे कहूँ। शहनाई। जानवर। छोटा भाई। दादीमा। दिल दिया ददँ लीया। सगाई। मेरा मुनना। आबरू। अभिलाषा। बहारों की मंजिल। जुआरी। मेरे हमदम मेरे दोस्त। शिकार। ईनतकाम। गोमती के कीनारे बैगेरह।।
शराब की लत ने उसे पैसों और शरीर से बे हाल कर दिया और अदभुत आवाज के धनी ईस कलाकार ने केंनसर की बिमारी से अपनी जान गवा दी...!
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