हिंदी फिल्म जगत के खलनायक : मनमोहन

मन मोहन....! 
हिंदी फिल्म जगत यानी बोलीवुड में बाबु राव पेंढारकर से लेकर शक्ति कपुर और गुलशन ग़ोवर तक न जाने कीतने अभीनेताओ ने खलनायक यानी विलन के चरित्र निभाये हे.. लेकिन उन अभीनेताओ में गुजराती अभीनेता कितने होगें?   बहुत कम.. !  महावीर शाह और मनोज जोषी हे.. लेकिन वह जयादा प़भावक नहीं रहे.. परेश रावल ने थोड़ी खलनायकी की... लेकिन बाद में  उसने कोमेडी  और चरीत्र अभीनेता के रोल में अपने आप को  शिफ्ट कर दिया..! 

सही मायने में मनमोहन पहले गुजराती अभीनेता थे जीसका नाम खलनायकी में मशहूर हुआ...! 

मनमोहन भाइचंद पंचमिया उसका पुरा नाम था.वह गुजराती जैन बनिया थे..मनमोहन का वतन गुजरात का एक छोटा सा शहर सावर कुंडला था  लेकिन तारीख 25.9.1933 या 34 के रोज मनमोहन का जन्म जमशेद पुर में हुआ था उनके पिता के कइ बिजनेस थे.. मनमोहन के चार भाइ और चार बहनों का बड़ा परिवार था.. 

मनमोहन को फिल्में  देखने का बहुत शौक था.. प़ाण साहब उनके चहिते अभीनेता थे तो फिलमों मे में काम करने की इच्छा से नवम्बर 1962 के अरसे में वह जमशेदपुर से बंबई आ गये.. 

बंबई आकर मनमोहन ने जी. पी. सिप्पी.. भप्पी सोनी.. संगीतकार जयकिशन के साथ  अच्छी पहेचान बनाली.. 
मनमोहन  धनिक परिवार से थे.. घर से बहुत सारे पैसे लेकर बंबई आये थे.. फिल्म चार दिवारी के निर्माता जगन शर्मा और अभीनेत्री साधना के पति आर. के. नैयर ने अगर मनमोहन   फिलमों में फाइनांस करे तो उनकी अगली फिलमों में रोल देने की शर्त रखी... मनमोहन तैयार थे लेकिन किसी कारण बात नहीं बनी..! 

सुनिल दत्त और केवल पी.कस्यप के साथ मनमोहन का परिचय हुआ. फिल्म मुझे जीने दो  के लिए पहली बार मनमोहन ने केमेरा का सामना किया.. लेकिन फिल्म पुरी हुइ तो उसमें मनमोहन कहीं दिखाई नहीं दिये..! आर. के.नैयर की फिल्म यह रास्ते हे प्यार के मे मनमोहन ने बिलकुल छोटा सा किरदार निभाया.. 

मनमोहन को सही तक मिली सन 1965 में मनोज कुमार की फिल्म शहीद मे.. ; फिल्म शहीद में मनमोहन  ने चंद़शेखर आजाद की भुमिका निभाई.. इस फिल्म में मनमोहन खलनायक नहीं थे..! 
सन 1965 में ही मनमोहन की ओर फिल्में जानवर और गुमनाम भी आइ. 

सन 1966 में मनमोहन की ६ फिल्में आइ.. मेरा साया.. उसकी  कहानी.. ईतयादी... 

सन 1968 में मनमोहन की ५ फिल्में आइ.. भप्पी सोनी की फिल्म ब़हमचारी तो थी ही.. फिल्म बाजी मे शराबी का रोल किया.. सिनेगोअर्स एसोसिएशन ने मनमोहन को श्रेष्ठ सह अभीनेता का एवोर्ड दिया.. 
सन 1969 में मनमोहन की 7 फिल्में आइ.. सत्यकाम.. तुमसे अच्छा कौन हे.. धरती कहे पुकार के और आराधना... आराधना के बाद राजेश खन्ना से भी मनमोहन की अच्छी दोस्ती हो गई.. 

शक्ति सामंत की पांच और प़मोद चक़वर्ती की चार फिल्मों में मनमोहन ने काम किया.. सन 1971 में १० और 1973 में 12 फिल्मों में मनमोहन ने काम किया..
मनमोहन की एसी इमेज बन गइ थी कि अगर फिल्म में मनमोहन हे तो प़ेक्षक मान ही लेते थे कि वह जरूर हिरोइन पर रेप करेगा..! फिर भी मनमोहन ने फिल्म मेरा साया में डोकटर का.. प़ेम पुजारी में आर्मी ओफिसर..प़ेम में शर्मिला टैगोर के पति.. रोटी कपड़ा और मकान मे पुलिस ओफिसर के रोल भी किये हे..! 

मनमोहन का एक डायलॉग बस यहीं तो मार खा गया हिंदुस्तान..! फेमस हे. ! 

सुना हे सुनिल दत्त की फिल्म मन का मीत मनमोहन ने छोडने के बाद विनोद खन्ना को मिली थी..! 

मनोज कुमार की फिल्म क़ांति शायद मनमोहन की आखरी फिल्म थी.
तारीख 6.8.1979 के रोज सिर्फ 45 साल की उम्र में ही मनमोहन का देहांत हो गया.. ! 
मनमोहन के संतान हेमंत.. ममता.. नितिन.. बगैरह हे.. 
नीतिन मनमोहन ने 20 फिलमों का निर्माण किया.. बोल राधा बोल.. लाडला.. चल मेरे भाई ईतयादी नीतिन की सुपरहिट फिल्में हे.. 

 फिल्म  प्यार  ही प्यार  1969 में एक गाना था.. में तेरा.. तु मेरी  दुनिया जले तो जले... ना.. ना.. ना.  इस गाने को वैजयन्ती माला धरमेन्द़ और मनमोहन पर फिलमाया गया था.. मुजे याद हे..!!

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