गणेश जी से अलग अलग मनोकामना के लिए हैं अलग अलग मंत्र : करें जाप और पूरी करें मनोकामना

चलिए जानते हैं उन मंत्रों के बारे में...

1. नौकरी व व्यवसाय संबंधी समस्या होगी दूर

गणेश जी की पूजा दौरान 'ऊं श्रीं सौम्याय सौभाग्याय गं गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानाय स्वाहा।' मंत्र का जप करें। मान्यता है कि इससे नौकरी-व्‍यवसाय संबंधी परेशानियां दूर होती है।

2. मनचाहा फल पाने के लिए

अगर आपके मन में कोई इच्छा है तो इस दौरान सच्चे मन से बप्पा की पूजा करें। इसके साथ ही 'ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश, ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, मेरे दूर करो क्लेश।' मंत्र का जप करें।

3. धन प्राप्ति के लिए

अगर आप आर्थिक स्थिति से जुझ रहे हैं तो गणेश जी की कृपा पाने के लिए 'ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा' मंत्र का जप करें।

4. आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए

अगर आपमें आत्‍मव‍िश्‍वास की कमी है या आपके काम बनते-बनते ब‍िगड़ते रहे हैं तो बप्पा की पूजा दौरान 'ऊं गं नमः' मंत्र का जप करें।

5. घर में सुख शांति लाने के लिए गणेशोत्सव दौरान 'ॐ ग्लौं गं गणपतये नम:' मंत्र का जप करें।

6. घर-क्लेश से बचने के लिए

जैसे की सभी जानते हैं प्रथम पूजनीय गणेश जी सुख दिलाने वाले भगवान है। ऐसे में जो लोग घर-क्लेश से परेशान है वे बप्पा के 'गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:' मंत्र का जप करें।

7. धन, ज्ञान, संतान सुख की प्राप्ति के लिए

गणेश जी सुख-समृद्धि व ज्ञान के देवता है। ऐसे में आप धन, ज्ञान प्राप्ति के लिए बप्पा के इस मंत्र का जाप कर सकती है। मान्यता है कि इस मंत्र का जप करने से निसंतान वालों से संतान प्राप्ति भी होती है।

'विद्यार्थी लभते विद्यां, धनार्थी लभते धनम्, पुत्रार्थी लभते पुत्रान्-मोक्षार्थी लभते गतिम्'

8. तेजस्वी संतान के लिए

हर कोई चाहते हैं कि उनकी संतान समझदार व अच्छे गुणों वाली हो ऐसे में तेजस्वी संतान के लिए गणेश जी के इस स्तोत्र को पढ़ें।

'ॐ नमोस्तु गणनाथाय, सिद्धिबुद्धि युताय च,
सर्व प्रदाय देहाय पुत्र वृद्धि प्रदाय च,
गुरुदराय गरबे गोपुत्रे गुह्यासिताय ते,
गोप्याय गोपिता शेष, भुवनाय चिदात्मने,
विश्व मूलाय भव्याय, विश्व सृष्टि कराय ते,
नमो नमस्ते सत्याय, सत्यपूर्णाय शुंडिने,
एकदं‍ताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नम:,
प्रपन्न जन पालाय, प्रणतार्ति विनाशिने,
शरणंभव देवेश संततिं सुदृढ़ां कुरु,
भविष्यंति च ये पुत्रा मत्कुले गणनायक:,
ते सर्वे तव पूजार्थं नि‍रता: स्युर्वरोमत:,
प‍ुत्र प्रदं इदंस्तोत्रं सर्वसिद्धिप्रदायकम।'



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