उत्तर प्रदेश में इस वेरिएंट की पुष्टि हुई है। इस वायरस से संक्रमित दो मरीजों में पुष्टि हुई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कप्पा वेरिएंट डेल्टा प्लस से भी अधिक खतरनाक है। अभी तक किए गए शोध में सामने आया कि डेल्टा प्लस करीब 60 फीसदी तक खतरनाक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इस वायरस के स्ट्रेन का नाम बी.1617.1 है। इसे कप्पा वेरिएंट कहा जाता है। वहीं डेल्टा प्लस को बी.1617.2 कहा जाता है।
कप्पा वेरिएंट के लक्षण
डेल्टा प्लस वेरिएंट की तरह ही कप्पा वेरिएंट के लक्षण मिलते जुलते अभी तक सामने आए है। जी हां, कप्पा वेरिएंट से संक्रमितों में भी खांसी, बुखार, गंध चले जाना, स्वाद चले जाना जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। यह वायरस भी अन्य वायरस की तरह म्यूटेंट हो सकता है। इसलिए लक्षण नजर आने पर लापरवाही नहीं करें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
कप्पा वेरिएंट से बचाव के उपाय
डेल्टा प्लस की तरह कप्पा भी कोरोना का ही म्यूटेंट वायरस है। इसलिए किसी भी प्रकार के वायरस से बचाव के लिए
- सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
- डबल मास्क का उपयोग करें।
- हैंड सैनिटाइज करते रहें।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने डेल्टा प्लस वेरिएंट को ‘वेरिएंट आफ कंसर्न’ घोषित किया है। वहीं कप्पा वेरिएंट को ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया है। इसका मतलब अभी इस वेरिएंट पर शोध जारी है।