सरसों तेल के दाम में वृद्धि की वजह क्या है? कैसे तय होते हैं दाम ?

सरसों तेल के दाम में वृद्धि की वजह क्या है?

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर सरसों के तेल के दाम में वृद्धि की तीन मुख्य वजह बताते हैं. उनका कहना है कि भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सरसों तेल में किसी भी अन्य तेल को मिलाने (Blending) पर रोक लगा दी है. सरसों के तेल में तय मात्रा में अन्य खाद्य तेलों के सम्मिश्रण को ब्लेंडिंग कहते हैं. इससे सरसों तेल की ऑफीशियल मिलावट बंद हो गई है. इससे सरसों के शुद्ध तेल की खपत में तेजी से इजाफा हुआ है.

दूसरी वजह यह है कि कोरोना काल के बाद के सेहत के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ी है. लोग मान रहे हैं कि जो देसी तेल है वही अच्छा है. इसलिए भी रिफाइंड की जगह काफी लोग सरसों के तेल पर शिफ्ट हो गए हैं. तीसरी वजह यह है कि अब खाद्य तेलों का रेट इंटरनेशनल मार्केट में तय हो रहा है. इसलिए इसका दाम बेकाबू है.

दाम का ये है गणित

-एक क्विंटल सरसों में औसतन 36 लीटर तेल निकलता है.
-सरसों का औसत दाम 7500 रुपये क्लिंटल चल रहा है.
-इस तरह शुद्ध तेल का दाम 208 रुपये प्रति लीटर होगा.
-इस पेराई करने वाला अपना मुनाफा जोड़ेगा.
-एक क्विंटल सरसों में करीब 60 किलो खली निकलेगी.
-करीब 1320 रुपये की खली होगी.
-इससे कोल्हू, ट्रांसपोर्टेशन और मार्केटिंग का खर्च निकल जाएगा.

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