पर्यावरण दिवस पर चौ. चरणसिंह यूनिवर्सिटी मैरठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस का हुआ उद्बोधन


बुरहानपुर- 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी मैरठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होकर पर्यावरण संरक्षण गतिविधि पर वर्चुअल-वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से उद्बोधन दिया।  इस अवसर पर अतिथि के रूप में दीनयाल रिसर्च इंस्टीट्यूट नईदिल्ली के महासचिव श्री अतुल जैन, बौद्ध गाया यूनिवर्सिटी बिहार के प्रो.उमेश के. सिंह, उत्तरप्रदेश के वन विभाग मुख्य वनरक्षक एन.के.जानू, पर्यावरणविद् डॉ.रजत भार्गव, चौधरी चरणसिंह यूनिवर्सिटी मैरठ के कुलपति प्रो.ए.के.तनजेरा, प्रो.वाय विमला एवं नीलू गुप्ता ने कार्यक्रम में सम्मिलित होकर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।


श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का असर हमारी जीवन शैली पर आज के दौर का सबसे बड़ा प्रश्न है। ग्लोबल वार्मिंग से हो रही जलवायु परिवर्तन को अगर समय पर न रोका गया तो जीवनदायिनी गंगा बाढ़ और तबाही ले आएगी। तापमान बढ़ता जाएगा। तमाम वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों ने चिंताएं जताई हैं। कल्पना कीजिए उस विश्व की जहां प्रकृति ने हमें रंग-बिरंगे फूलों से लेकर, कई तरह के पेड़, पहाड़, नदी, ताल-तलैया, बाग-बगीचे सब कुछ दिए और तुलना कीजिए कि आज हम कहां खड़े हैं। प्रकृति ने जो हमें दिया था, क्या उसे हम सुरक्षित रख पाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण हमारा पोषण करता है और हमें जीवित रहने में मदद करता है। हम हवा, पानी और मिट्टी के बिना जीवन की कल्पना नहीं कर सकते। पौधे और जानवर जैसे जैविक घटक भी जीवित रहने के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। आज पर्यावरण के असंतुलन से सम्पूर्ण विश्व आपदाओं से घिरा हुआ है। हम यह भी जानते है कि इसका मुख्य कारण विश्व की जनसंख्या में अप्रत्याशित वृद्धिय जिसके फलस्वरूप विकसित व विकासशील देशों में औद्योगिकीकरण की बढ़ोत्तरी हुई और पृथ्वी के अवयवों का विशेषकर-हाइड्रोकार्बन का अनियमित दोहन हुआ है। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि विश्व पर्यावरण क्षति हेतु 20-प्रमुख चुनौतियाँ का सामना कर रहा है। प्रदूषण, मिट्टी का क्षरण, ग्लोबल वार्मिंग, अधिक जनसंख्या, प्राकृतिक संसाधनों का ह्रास, स्थायी अपशिष्ट उत्पन्न करना, अपशिष्ट निपटान, वनों की कटाई, धु्रवीय बर्फ की टोपियां, जैव विविधता का नुकसान, जलवायु परिवर्तन, महासागर अम्लीकरण, नाइट्रोजन चक्र, ओजोन परत का क्षरण, अम्ल वर्षा, जल प्रदूषण, ओवरफिशिंग, शहरी फैलाव, सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे और जेनेटिक इंजीनियरिंग।
पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस हमें पर्यावरण के संरक्षण-संवर्धन के लिए कार्य करने को प्रेरित करता है। इसके साथ हमें यह भी स्मरण करवाता है कि मनुष्य का अस्तित्व भी पर्यावरण पर ही निर्भर है। पिछले दिनों कोविड महामारी के दौरान पूरे देश में ऑक्सीजन संकट देखा गया, तब सभी ने प्रकृति और पेड़ों के महत्व को महसूस किया। ऐसी परिस्थितियों में आज हमें अधिक से अधिक मात्रा में पेड़ लगाने को संकल्पित होना चाहिए। पेड़ हमारी पृथ्वी के लिए ऑक्सीजन की प्राकृतिक फैक्ट्री हैं। पेड़ पक्षियों और पशुओं के लिए घरौंदा और आश्रय स्थल भी हैं। पेड़ों का हमारे पारस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) संवारने में अहम योगदान है। क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए जनसहभागिता सुनिश्चित कर पेड़ लगाए और उन्हें संरक्षित भी किया जाए जिससे कि हमें स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौका मिले, हम स्वस्थ रह सकें और पर्यावरण को भी समृद्ध बना सकें। पिछले कुछ समय में मानवीय गतिविधियों ने प्रकृति को बड़ी क्षति पहुंचाई है पेड़ लगाने से हम प्रकृति और मनुष्य के बीच बढ़ी इस दूरी को भी कम कर पाएंगे। प्रकृति को यह हमारी सबसे अनुपम भेंट होगी। उन्होंने इस मुठ्ठी भर मृदा जिससे जनमा हमारा अस्तित्व, हम इसे सहेजकर रखें ताकि भोजन, ईधन और आवास सर्वदा सुलभ रहे। लेकिन इसके दुरूपयोग के साथ ढह जाएगी यह भूमि और अवसान शुरू होगा मानवता का। 


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