थर्मल स्कैनर क्या होता ? यह कैसे काम करता है और यह किन बीमारियों की जांच में मदद करता है ?

थर्मल स्कैनर क्या होता ?
थर्मल स्कैनर, इन्फ्रारेड थर्मोग्राफी के माध्यम से कार्य करता है. 

इन्फ्रारेड थर्मोग्राफी एक डिजिटल छवि प्रदान करती है जो तापमान पैटर्न को दिखाती है. यह सिस्टम 40°C से 500°C तक के तापमान को माप सकता है. 
व्यक्ति के शरीर का तामपान बदलने के साथ साथ थर्मल इमेज का रंग भी बदलता जाता है. कुछ डिवाइस में रंगों के पैटर्न के अलावा बाकायदा शरीर का तापमान भी लिखा हुआ आता है

इतना ही नहीं किसी व्‍यक्ति के शरीर का तापमान सामान्‍य से अधिक होने पर यह स्‍कैनर बीप के माध्‍यम से सिग्‍नल भी देते हैं.

थर्मल स्कैनर कैसे काम करता है ?

थर्मल स्कैनर को मुख्य रूप से एअरपोर्ट,रेल्वे स्टेशनों, मॉल, सिनेमाघरों जैसी भीड़ वाली जगहों पर लगाया जाता है. 

जब कोई व्यक्ति इस स्कैनर के सामने से गुजरता है तो व्यक्ति के शरीर में मौजूद विषाणु, इंफ्रारेड तस्वीरों में दिखाई पड़ते हैं. 

जिन व्यक्तियों के शरीर में विषाणुओं की संख्या अधिक या खतरनाक स्तर पर पहुँच जाती है उनके शरीर का तापमान बढ़ जाता है. ऐसे लोगों को भीड़ से अलग करके उनकी जांच की जाती है.

किन किन बीमारियों को डिटेक्ट करता है थर्मल स्कैनर ?

यह माना जाता है कि इन्फ्रारेड कैमरों का उपयोग संभवतः बुखार, सार्स के लक्षण और एवियन इन्फ्लूएंजा जैसे विषयों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है. 

यहाँ पर यह बात ध्यान देने वाली है कि थर्मल इमेजर त्वचा के तापमान को मापता है न कि शरीर के अंदर के तापमान को. हालांकि, इंफ्रारेड सिस्टम की सटीकता - मानव, पर्यावरण और उपकरण की क्वालिटी से भी प्रभावित हो सकती है.
इस प्रकार स्पष्ट है कि थर्मल स्कैनर की मदद से कोविड 19 से प्रभावित लोगों की पहचान करना एक सस्ता, तेज और विश्वसनीय कदम है. 

मेडिकल संसार ग्रुप से जुड़ने के लिए इस नीली लाइन को टच करे 👈

Post a Comment

Previous Post Next Post