पानी कम पीना -
दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना बहुत जरूरी होता है क्योंकि पानी की कमी से शरीर हाइड्रेट नहीं हो पाता और ब्लड में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इससे आप डायबिटीज की चपेट में आसानी से आ जाते हैं।
नाश्ता स्किप करना -
सुबह का नाश्ता छोड़ना भी डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण है। दरअसल, सुबह नाश्ता न करने से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है।
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स का सेवन:
व्हाइट ब्रेड, व्हाइट राइस, मैदा या फिर अन्य रिफाइंड कार्बोहाड्रेट्स शरीर को ज्यादा इंसुलिन बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसकी वजह से आपको जल्दी भूख लगने लगती है और आप ओवरइटिंग कर लेते हैं। इससे डायबिटीज होने के चांसेस बढ़ जाते हैं।
बैठ कर घंटों काम करना -
ऑफिस में पूरे दिन कुर्सी पर बैठकर काम करते रहने से डायबिटीज का खतरा अधिक होता है। डेस्क वर्क करने वाले घंटों कुर्सी पर बैठे रहते हैं और उन्हें उठने का वक्त नहीं मिलता, घंटों कुर्सी पर बैठे रहने की ये आदत डायबिटीज के साथ-साथ दिल का मरीज भी बना सकती है।
विटामिन डी की कमी होना:
एक शोध के अनुसार, डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण है बॉडी में विटामिन-डी की कमी होना। विटामिन डी की कमी वाले लोगों को डायबिटीज का सबसे ज्यादा खतरा होता है। विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए डाइट में विटामिन डी को शामिल करें। कम से कम आधा घंटा धूप में जरूर रहे।
प्लास्टिक के बर्तनों में खाना -
शोधकर्ताओं का कहना है कि प्लास्टिक रैप और कंटेनर्स में पाए जाने वाले केमिकल्स इंसुलिन से प्रतिरोधक क्षमता को काफी बढ़ा देते हैं। यही डायबिटीज के शुरूआती लक्षण है।
कॉफी का सेवन नहीं करना:
कुछ लोग कॉफी पीने से बेहद परहेज करते हैं, लेकिन आप जानते हैं ,कॉफी पीने से टाइप- 2 डायबिटीज के खतरे से बचा जा सकता है। अगर आप भी बिल्कुल कॉफी नहीं पीते तो आप इसकी चपेट में आ सकते हैं।
अनियमित दिनचर्या -
देर रात तक जागना, कम नींद लेना, भोजन न करना, सिगरेट और शराब पीना जैसा बिगड़ता लाइफस्टाइल डायबिटीज को बढ़ावा देता हैं। दरअसल, इससे बॉडी में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ जाता है, जिससे आप टाइप- 2 डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं।
ज्यादा टीवी देखना -
दिन में 6-7 घंटे टीवी देखते हैं तो आप शुगर की चपेट में आ सकते हैं। एक स्टडी में बताया गया है कि टीवी के सामने गुजारा गया हर घंटा डायबिटीज का खतरा करीब 4 फीसदी तक बढ़ा देता है।
ज्यादा तनाव लेना -
तनाव से निपटने के लिए शरीर को ऊर्जा की ज़रूरत पड़ती है. इसलिए जब भी स्ट्रेस होता है, तो एड्रिनल ग्रंथि ख़ून में ग्लूकोज़ लेवल को बढ़ाती है, जिससे तनाव के समय ऊर्जा की ज़रूरत पूरी हो सके. जहाँ, बिना डायबिटीज़ वाले लोगों (नॉन डायबिटिक) के शरीर में शुगर, इंसुलिन हॉर्मोन के ज़रिये रेगुलेट होता है, वहीं डायबिटिक लोगों को अपने शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर रखने के लिए काफ़ी कोशिशें करनी पड़ती हैं.