खंडवा(शेख़ आदिल) - जैन धर्म में मोक्ष पाने के लिए श्रद्धालु त्यौहारों पर जहां तप-तपस्या और उपवास कर पूजा अर्चना करते हैं वहीं जैन धर्म में पर्यूषण को महान पर्व मना गया है। पर्यूषण पर्व के दौरान इन दस दिनों में जहां प्रतिदिन देव दर्शन, नित्य नियम पूजा, अभिषेक व दस लक्षण मंडल विधान की पूजा के साथ प्रवचनों में श्रद्धालु धार्मिक उल्लास के साथ भाग लेते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार दो, तीन, पांच एवं दस उपवास करते हैं। उल्लेखनीय है कि जैन धर्म में जो उपवास किए जाते हैं वह निर्जला होते हैं जिसमें 24 घंटे अन्न, जल व अन्य खाद्य सामग्री का त्याग रहता है। समाज के सचिव सुनील जैन ने बताया कि जिले के लिए सौभाग्य का विषय है कि दस दिनों तक प्रतिदिन प्रात: जिनेन्द्र अभिषेक, शांतिधारा, दसलक्षण धर्म पूजन, नित्य नियम पूजन होंगे। 23 अगस्त से पर्यूषण पर्व शुरू होकर 1 सितंबर तक चलेंगे। इन दस दिनों में प्रतिदिन नित्य नियम पूजा के साथ मंडल विधान की पूजा एवं प्रवचनों का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। सुनील जैन ने बताया कि नगर के इतिहास में पहली बार मंदिरों में मंडल विधान का मांडना नहीं सजाया गया साथ ही मंदिरों में कोरोना वायरस महामारी के चलते पूजन नहीं होंगे। जिला प्रशासन के आदेश का पालन करते हुए पर्यूषण पर्व पर श्रद्धालु मंदिरों में सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए मात्र दर्शन करेंगे और पूजा अर्चना अपने परिवार के साथ अपने घरों में ही करेंगे। मंदिरों में सिर्फ पुजारी ही नित्य नियम पूजा के साथ अभिषेक व शांतिधारा करेंगे। पर्यूषण पर्व की तैयारियां समस्त दिगंबर जैन मंदिरों में शुरू हो चुकी है। घासपुरा महावीर जैन मंदिर में शुक्रवार को सामाजिक बंधुओं ने अपने हाथों से मंदिर में विराजमान सभी मूर्तियों को चंदन, केसर, नींबू व अन्य सामग्रियों से साथ शुद्ध जल से अभिषेक किया वहीं मंदिर की घंटी के साथ ही छत्र, सिंहासन व पूरे मंदिर की साफ-सफाई शुद्ध वस्त्र पहनकर श्रद्धालुओं द्वारा की गई। इस अवसर पर कार सेवा करते हुए महिलाओं ने भी मंदिर में साफ-सफाई के साथ मां जिनवाणी की साफ-सफाई करते हुए सुसज्जित किया। इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष दिलीप पहाडिय़ा, ट्रस्टी गेंदालाल गंगवाल, सचिव सुनील जैन, ट्रस्टी पवन रावका, जितेन्द्र लुहाडिय़ा, पुजारी जिनेन्द्र जैन उपस्थित थे।
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