सिद्धि, असिद्धि में सम रहने वाला व्यक्ति कर्मों से नहीं बंधता-ओमप्रकाश शर्मा

पंचशील नगर में आयोजित गीता स्वाध्याय कार्यक्रम सम्पन्न

दतिया @Medical Sansarnews.com>>>>>>>>>>>>>>>> जिस पुरुष ने समस्त कर्मों एवं कर्मफलों में आसक्ति, राग, द्वेष का हरप्रकार से त्याग कर दिया है तथा परमपिता परमेश्वर की भक्ति में नित्य तृप्त रहता है। जिसने अपनी समस्त इन्द्रियों एवं अन्तःकरण सहित शरीर को जीत लिया है। भोगों से विरक्ति, आशा रहित पुरुष केवल नित्य नियत कर्मों को करता है वह सिद्धि, असिद्धि में सम रहता है, 
वह कर्मों से नहीं बंधता है और उसके कर्म अकर्म हो जाते हैं।
उक्त उद्गार विश्वगीताप्रतिष्ठानम् के केंद्रीय परीक्षा प्रमुख ओमप्रकाश शर्मा दतिया ने छोटेलाल राय पंचशील नगर मैन गली में आयोजित गीता स्वाध्याय कार्यक्रम में सम्मिलित होकर व्यक्त किए। सुभाषित रामजीशरण राय, अमृत वचन अजय राय व प्रेरक प्रसंग श्री शर्मा जी ने कहा।

जैसा कि सभी को विदित है कि दतिया जिले में गीता स्वाध्याय कार्यक्रम २००९ से अनवरत विभिन्न गीता स्वाध्याय मंडलों में आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय ४ के १८ से २८ तक श्लोकों का गायन व अनुगायन किया गया। जिसका सार श्री शर्मा जी ने कहा।

कार्यक्रम का संचालन प्रशांत मिश्रा ने किया। इस अवसर पर तुलसीराम कुशवाहा व धर्मप्रेमियों ने सहभागिता सुनिश्चित की।
विश्वगीताप्रतिष्ठानम् की स्थापना सन् १९९७ विक्रम संवत २०५४ में भगवान श्रीकृष्ण जी की शिक्षास्थली उज्जयिनी में अनंत विभूषित अवंतिका पीठाधीश्वर स्वामी श्री रंगनाथाचार्य जी महाराज ने जीवन-मुक्त आचार्य श्री रमेश कुमार पाण्डेय जी एवं अन्य गीतानुरागियों द्वारा की गई थी। इस वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल मोक्षदा एकादशी ११-१२-२४ को उज्जयिनी में ५१०८ गीता पाठ होंगे, दतिया में भी १०८ गीता पाठ का आयोजन किया जाएगा। 
अनवरत रूप से संचालित गीता जी के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु श्रृंखलाबद्ध कार्यक्रम आगामी दिवस में गीता स्वाध्याय कार्यक्रम पंचशील नगर निवासी आयुष, पीयूष, नीतू-रामजीशरण राय के निवास पर आयोजित किया जावेगा जिसमें श्रद्धालु भक्तजन सादर आमंत्रित हैं। उक्त जानकारी केशवदत्त त्रिवेदी जिला संयोजक दतिया 
विश्वगीताप्रतिष्ठानम् ने दी।

Swadesh NBO/CSO

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