क्या आप जानते हैं काशी और विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी ये खास बातें ?

जानिए काशी और विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें.

1. काशी को प्राचीन सप्त पुरियों में से एक माना गया है।
अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका।
पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः॥
अर्थ- अयोध्या, मथुरा, माया यानी हरिद्वार, काशी, कांचीपुरम, अवंतिका यानी उज्जैन, द्वारिकापुरी, ये सातों मोक्षदायीनी पवित्र नगरियां यानी पुरियां हैं।

2. काशी विश्वनाथ का मंदिर हजारों साल पुराना है। मुगल काल के दौरान इस मंदिर को नष्ट कर दिया था। 18वीं शताब्दी में महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने यहां सोने के द्वार बनवाए थे।

3. काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर पर सोने का छत्र लगा हुआ है। इसके संबंध में मान्यता प्रचलित है कि इसके दर्शन मात्र से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं।

4. काशी में गंगा, वरुणा और असी यानी अस्सी नाम की पवित्र नदियां बहती हैं। यहां पर वरुणा और अस्सी नदी के बहने के कारण ही इस नगर को वाराणसी भी कहा जाता है। यह दोनों नदियां यहां से बहती हुईं, आगे जाकर गंगा नदी में मिल जाती हैं।

5. काशी के कई घाट बहुत प्रसिद्ध हैं। इनमें दशाश्वमेध घाट, मणिकार्णिका घाट, हरिशचंद्र घाट और तुलसी घाट आदि शामिल हैं। इन घाटों का विशेष महत्व है। इन घाटों से जुड़ी कई कथाएं धर्म ग्रंथों में मिलती हैं।

6. इसके 12 प्रसिद्ध नाम हैं। ये नाम इस प्रकार हैं - काशी, वाराणसी, अविमुक्त क्षेत्र, आनंदकानन, महाश्मशान, रुद्रावास, काशिका, तपस्थली, मुक्तिभूमि, शिवपुरी, त्रिपुरारि राज नगरी और विश्वनाथ नगरी।

7. महाभारत में भी काशी का उल्लेख है। यहां के राजा काशिराज की तीन पुत्रियां थीं। अंबा, अंबालिका और अंबिका। इनका स्वयंवर होने वाला था, तब भीष्म ने इन कन्याओं का अपहरण कर लिया था। महाभारत युद्ध में काशिराज ने पांडवों का साथ दिया था।

8. बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध का भी काशी से संबंध है। बौद्ध काल में काशी राज्य कोसल जनपद में आता था। कोसल की राजकुमारी का मगधराज बिंबिसार के साथ विवाह हुआ था। इस विवाह में काशी को दहेज में दिया गया था। गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश वाराणसी के पास स्थित सारनाथ में दिया था।

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